वार्ड संख्या 33 में 18 हजार की आबादी पर सिर्फ 10 सफाई कर्मी

सफाई की लचर व्यवस्था को लेकर नागरिकों की परेशानी बढ़ी. पार्षद से शिकायत करने पर वे मेयर और बोरो चेयरमैन के पास जाने को कहते हैं. इलाके में कूड़ेदान की कमी की बात स्वीकारी पार्षद ने, लोग जहां-तहां कूड़ा फेंकने को मजबूर. रानीगंज :आसनसोल नगर निगम अंतर्गत वार्ड नंबर 33 में प्रशासनिक सफाई व्यवस्था को […]

  • सफाई की लचर व्यवस्था को लेकर नागरिकों की परेशानी बढ़ी.
  • पार्षद से शिकायत करने पर वे मेयर और बोरो चेयरमैन के पास जाने को कहते हैं.
  • इलाके में कूड़ेदान की कमी की बात स्वीकारी पार्षद ने, लोग जहां-तहां कूड़ा फेंकने को मजबूर.
रानीगंज :आसनसोल नगर निगम अंतर्गत वार्ड नंबर 33 में प्रशासनिक सफाई व्यवस्था को लेकर लोगों में भारी नाराजगी है. इलाकों में कूड़ेदान की कमी होने के कारण जगह-जगह कचड़ा भरा पड़ा है. नालियों की स्थिति जर्जर होने तथा नियमित सफाई ना होने के कारण नाली का गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है. वार्ड पार्षद नारायण बाऊरी अपने वार्ड की सफाई व्यवस्था को लेकर पूरी तरह से संतुष्ट हैं. 18 हजार की आबादी वाले इस वार्ड में सिर्फ 10 सफाई कर्मी हैं. सफाई को लेकर पार्षद की संतुष्टि जमीनी स्तर पर खोखली है.
आंखों देखी.
वार्ड नंबर 33 के छह-सात नंबर कॉलोनी, शीतल दास तथा रानीसायर इलाका के हटिया एवं अन्य जगहो में गंदगी का अंबार है. गंदगी से लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है. छह-सात नम्बर कॉलोनी में रास्ते के बीच डस्टबिन बना दिए जाने से वहां पर रहने वाले लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है.
कचड़ा की सफाई ना होने से यह पशुओं का चारागाह में बन गया है. वार्ड में कूड़ेदान की भारी कमी है. जिसके कारण लोग कहीं भी कूड़ा फेंक देने से इलाके में गंदगी की भरमार है.
क्या कहते हैं स्थानीय नागरिक?
रानीसायर निवासी राजेंद्र कुमार ने कहा कि कचड़ा की नियमित सफाई ना होने के कारण जगह-जगह गंदगी फैली हुई है. कभी कभार कचड़े की सफाई होती है. हटिया इलाके में कचड़े की ढ़ेर है. यहां सप्ताह में तीन दिन हटिया लगती है. ब्लीचिंग पावडर तथा कीटनाशक का छिड़काव कई माह पूर्व एक बार हुआ था.
शीतल दास कॉलोनी के निवासी देवेंद्र राम कहार ने कहा कि इलाके में सफाई सही तरीके से कभी नहीं होती है. सफाई को लेकर वार्ड पार्षद शिकायत करने पर वे कहते हैं कि सफाईकर्मियों की कमी है. इसकी शिकायत शिकायत मेयर अथवा बोरो चेयरमैन से करें.
शीतलदास कॉलोनी के निवासी रासबिहारी साव ने कहा कि मोहल्ले में नियमित सफाई ना होने के कारण कचड़ा चारों ओर फैलता है. कीटनाशक और ब्लीचिंग पावडर का छिड़काव नहीं होता है. जिससे इलाके में मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बना हुआ है.
शीतलदास कॉलोनी के निवासी विजय पासवान ने कहा कि मोहल्ले में सभी नालियों की हालत जर्जर है. सफाईकर्मी के प्रमुख को इन नालियों की सफाई करने की बात कहने पर वह आनाकानी करते हैं. सफाई के लिए पैसों की मांग करते हैं.
नंदू पासवान ने बताया कि मोहल्ले में ब्लीचिंग, फॉगिंग या कीटनाशक की बात तो छोड़ ही दीजिए. कई बार पार्षद को बोलने पर पार्षद सफाई कर्मी को भेजते हैं एवं कभी कभार नाली की सफाई हो जाती है, जबकि दुर्गंध भरे वातावरण में हम रहने के लिए मजबूर है।
छह-सात नंबर इलाके की निवासी हसना हन्नन बेगम ने कहा कि रास्ते के बीच कूड़ेदान बना दिया गया है. पूरे मोहल्ले का कचड़ा यहां फेंका जाता है. कूड़ेदान की नियमित सफाई न होने से इससे फैलने वाली दुर्गंध के बीच लोगों को रहना पड़ता है. कूड़ेदान को यहां से हटाने के लिए कई बार शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई. सिर्फ पर्व- त्यौहार के मौके पर ही ब्लीचिंग पावडर का छिड़काव होता है. मच्छर मारने के लिए फॉगिंग मशीन का उपयोग होते मोहल्ले में किसी ने नहीं देखा है.
क्या कहते हैं वार्ड पार्षद?
पार्षद नारायण बाऊरी ने का कहना है कि उनके वार्ड में कुल 10 सफाईकर्मी हैं. कर्मी नियमित रूप से वार्ड के विभिन्न इलाकों की सफाई करते हैं. ब्लीचिंग पावडर तथा कीटनाशक का छिड़काव नियमित होता है. नालियों की सफाई नियमित होती है. उन्होंने माना कि वार्ड में कूड़ेदान की कमी के कारण लोग जहां-तहां कचड़ा फेंक देते हैं, यह एक बड़ी समस्या है.

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