बेहोशी के बाद आंख खुलने पर खुद को जंगल में पाया
जसीडीह आरपीएफ पोस्ट में पहुंच कर आपबीती बतायी
आरपीएफ ने उन्हें आसनसोल पहुंचाया, पुलिस ने मेडिकल जांच करायी
आसनसोल : आसनसोल नॉर्थ थाना अंतर्गत गिरमिट वनविष्णुपुर इलाके से मंगलवार भोर में अपहृत व्यवसायी परीक्षित माझी उर्फ ननका अपहरणकर्ताओं की चंगुल से निकल कर रात आसनसोल लौट आये. घर से दुकान जाने के क्रम में रास्ते में उनका अपहरण हुआ था. उन्होंने बताया कि अपहरणकर्ता उन्हें जसीडीह इलाके के किसी जंगल में बंधक बना कर रखे थे, जहां से वे निकल कर जसीडीह आरपीएफ पोस्ट में पहुंचे. आरपीएफ की मदद से वे जसीडीह से आसनसोल आये. आसनसोल स्टेशन से आरपीएफ के अवर निरीक्षक दिपंकर दे, राजेश मंडल उन्हें लेकर आसनसोल नार्थ थाना गये.
दो घंटे तक पूछताछ के बाद रात बारह बजे पुलिस ने उन्हें घर पहुंचा दिया. बुधवार सुबह को भी पुलिस ने उन्हें थाने में लाकर लंबी पूछताछ की. पुलिस को अपराधियों के विषय में उनसे कोई सुराग नहीं मिल पाया. कांड को लेकर रहस्य बरकार है. अपराधी अपनी जान पर खेलकर जिस व्यक्ति का अपहरण कर ले जाते हैं. वह व्यक्ति इतनी आसानी से उनके चंगुल से निकल कर सकुशल घर वापस आ जाता है. इस विषय पर गंभीरता से जांच कर रही है.
क्या है मामला?
वनविष्णुपुर निवासी परीक्षित मंगलवार भोर चार बजे घर से साइकिल लेकर डेढ़ किलोमीटर दूर अपनी दुकान के लिए निकलते हैं. प्रतिदिन वे इसी समय घर से दुकान के लिए निकलते हैं. परीक्षित ने बताया कि मंगलवार को दुकान से सौ मीटर पहले कुछ लोग उन्हें घेर लिये और मुंह में गमछा बांध कर घसीटने लगे. विरोध करने पर पिस्टल की हथेली से सिर पर वार किया. घसीट कर वे लोग अपनी चार पहिया वाहन में डाल दिये. वाहन में बैठे कुछ लोग उन्हें इंजेक्शन दिया और वह बेहोश हो गये.
सुबह हो जाने के बाद भी दुकान न खुलने पर घरवाले और इलाके के लोगों ने उनकी तलाश आरम्भ की. पास के ही तालाब किनारे उनकी साइकिल और चप्पल मिली. खून के कुछ धब्बे भी मिले. घरवालों ने आसनसोल नार्थ थाने में अपहरण की शिकायत दर्ज करायी. स्थानीय लोगों ने घटना को लेकर विरोध प्रदर्शन आरम्भ किया. पुलिस उपायुक्त (ट्रैफिक) पुष्पा घटनास्थल पर जाकर खुद जांच की.
शाम को परीक्षित ने घरवालों को फोन किया
परीक्षित ने बताया कि बेहोशी के बाद जब उनकी आंख खुली तब वे खुद को एक सुनसान जंगल में पाया. चार अपहरणकर्ता वहां खड़े थे. वहां एक शव भी पड़ा था. होश आने पर उन्होंने अपहरणकर्ताओं से अनुरोध किया कि उन्हें छोड़ दे. उनलोगों ने 25 लाख रुपये मांगे. परीक्षित ने उनसे कहा कि वे चाय नास्ता की दुकान चलाते हैं. 50 हजार रुपये तक दे सकते हैं. वे उनकी बात नहीं माने. वे लोग आपस में कुछ दूर पर बात कर रहे थे.
परीक्षित ने कहा कि उनलोगों का ध्यान उन पर नहीं था. इसी मौके का फायदा उठा कर वे वहां से भाग निकले. एक घंटा भागने के बाद एक बाइक चालक से उनकी मुलाकात हुई. उसे उन्होंने सारी घटना बतायी. बाइक चालक ने उन्हें जसीडीह स्टेशन तक छोड़ दिया. वे आरपीएफ के पास गये और आपबीती सुनायी.
आरपीएफ अधिकारी के मोबाइल फोन से उन्होंने अपने घरवालों से संपर्क किया और बताया कि वह सकुशल है. घरवालों ने थाने में आकर घटना बताई और फोन नंबर भी दिया जिससे नंबर से परीक्षित ने संपर्क किया था. पुलिस ने उस नम्बर पर फोन किया और आरपीएफ अधिकारी से उन्हें आसनसोल भेजने का अनुरोध किया. आरपीएफ ने उन्हें जसीडीह आसनसोल लोकल ट्रेन से आसनसोल पहुंचाया. आसनसोल आरपीएफ उन्हें थाने ले गयी. थाने से उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया. फिर थाने में लाकर पूछताछ के बाद घर छोड़ दिया.
अपहरण की घटना पर रहस्य बरकरार
परीक्षित माझी का मंगलवार सुबह अपहरण हुआ और 10 घंटे के अंदर वह अपहरणकर्ताओं के चंगुल से निकल गये. यह बात पुलिस के लिए जांच का प्रमुख मुद्दा है. साइकिल लेकर घर से आ रहे एक साधारण व्यक्ति का अपहरण होना, पैसे के लिए नहीं हो सकता है. चर्चा यह चल रही है अंग बेचने वाले गिरोह ने अपहरण किया. सवाल यह है कि जो लोग आसनसोल में आकर एक व्यक्ति का अपहरण कर सैकड़ो जोखिम लेकर जसीडीह तक ले जा सकते है. वह उसे भागने का इतना आसान मौका कैसे दे सकते है? पुलिस सभी पहलू की गहन जांच कर रही है.
शाम को फोन आते ही घर के लोगों ने ली राहत की सांस
श्रीमती माझी ने कहा कि पति के अपहरण होने की सूचना मिलते ही घर में मातम छा गया. दोनों बेटियां अंकिता और संचिता न स्कूल गई ओर न किसी ने अन्न का एक दाना खाया. शाम को जब फोन पर उनकी आवाज सुनी और उन्होंने कहा कि वे सकुशल हैं. तब सभी ने राहत की सांस ली. जबतक वे आसनसोल नार्थ थाना में नहीं पहुंचे किसी ने कुछ नहीं खाया.
मंगलवार को भी पुलिस ने की पूछताछ
आसनसोल नार्थ थाना पुलिस ने कांड में लिप्त अपराधियों की सुराग पाने के लिए मंगलवार को भी परीक्षित को थाने में बुलाकर घंटों पूछताछ की. पूछताछ में पुलिस को कोई खास सुराग अबतक नहीं मिली है. पुलिस इस कांड का खुलासा करने के लिए प्रयास में जुटी है.
मंगलवार को परीक्षित के घर में लगी रही भीड़
सोमवार को परीक्षित के अपहरण होने की खबर पूरे इलाके में फैल गयी. सोमवार से ही उनके रिश्तेदार और आस पास के लोगों का तांता उनके घर पर लगा रहा. सोमवार रात को वापस लौटने की खबर पाकर उनके पड़ोसी और रिश्तेदार उनसे मिलने और उनका हाल चाल जानने के लिए परीक्षित से मुलाकात की. हालांकि वे ज्यादा बातचीत करने की स्थिति में नहीं थे. घटना को लेकर वे अभी भी सदमे में हैं.
