UP Fake Doctors : उत्तर प्रदेश में फर्जी डिग्री के आधार पर डॉक्टर बनाने वाला अंतरराज्यीय गिरोह सक्रिय होने की बातें सामने आ रही हैं. हरियाणा की फर्जी डिग्री के आधार पर डॉक्टर बने 41 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने के बाद मामले की जांच शुरू हो गई है. अब राजस्थान और मध्य प्रदेश से डिग्री लेकर पंजीयन कराने वालों पर भी संदेह जताया गया है. इनकी डिग्रियों की भी जांच की जाएगी. मामले में बोर्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में होगी.
41 लोगों के खिलाफ दर्ज हुई रिपोर्ट
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आयुर्वेदिक तथा यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड के रजिस्ट्रार डॉ. अखिलेश कुमार वर्मा ने 41 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है. रिपोर्ट में आरोपियों के नाम के साथ अन्य अज्ञात लोगों के अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े होने की आशंका जताई गई है. आरोप है कि कूटरचित और फर्जी दस्तावेजों के जरिए अवैध रूप से वित्तीय लाभ कमाया जा रहा था. पुलिस ने मामले से संबंधित पत्रावलियां जुटानी शुरू कर दी हैं.
पंजीयन की व्यवस्था में हुआ बदलाव
पहले विश्वविद्यालय या कॉलेज से मिले सत्यापन पत्र और विश्वविद्यालय के गजट अथवा सूची के आधार पर पंजीयन किया जाता था. अब व्यवस्था बदल दी गई है और सत्यापन के बिना पंजीयन नहीं किया जा रहा है.
राजस्थान, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की डिग्री से भी पंजीयन
बोर्ड में राजस्थान, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की डिग्री के आधार पर भी कई लोगों का पंजीयन हुआ है. पंजीयन के बाद ये प्रदेश के विभिन्न जिलों में मरीजों का उपचार कर रहे हैं. राजस्थान के 10 और मध्य प्रदेश के छह डॉक्टरों की डिग्री फर्जी होने की शिकायत मिली है.
16 लोगों की डिग्री की जांच शुरू
बोर्ड ने पिछले 15 वर्षों में हुए पंजीयन की डिग्रियों की जांच का फैसला लिया है. फिलहाल राजस्थान के 10 और मध्य प्रदेश के छह, कुल 16 लोगों की पत्रावलियां निकलवाई गई हैं. संबंधित कॉलेजों को इनकी डिग्रियों के सत्यापन के लिए पत्र भेजे गए हैं.
