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Saturday, March 2, 2024

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अलीगढ़: डॉक्टर की गैर मौजूदगी में कंपाउंडर ने मासूम को लगा दी हैवी डोज का इंजेक्शन, बच्चे की मौत

अलीगढ़ के अस्पताल में डॉक्टर की गैर मौजूदगी में कंपाउंडर ने दस्त व बुखार का उपचार करवाने पहुंचे एक बच्चे को इंजेक्शन का हैवी डोज दे दिया, जिसके चलते उसकी मौत हो गई. बच्चें की मौत से गुस्साए परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया.

अलीगढ़ के थाना क्वार्सी क्षेत्र में देर रात डॉक्टर की गैर मौजूदगी में वाई के द्विवेदी अस्पताल में मौजूद कंपाउंडर के द्वारा दस्त का उपचार कराने पहुंचे एक बच्चे को दवाई की हैवी डोज दिए जाने के चलते उसकी मौत का मामला सामने आया है. जिसके बाद बच्चें की मौत से गुस्साए परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन ओर बच्चें को दवाई की हैवी डोज देने वाले कंपाउंडर को उसकी मौत का जिम्मेदार ठहराते हुए कार्रवाई किए जाने की मांग को लेकर अस्पताल के अंदर और बाहर सड़क पर जमकर हंगामा किया गया. अस्पताल परिसर में मृतक बच्चे के परिजनों द्वारा किए जा रहे हंगामे की सूचना पर इलाका पुलिस मौके पर पहुंची और अस्पताल परिसर में हंगामा कर रहे मृतक बच्चे के परिवार के लोगों को अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई किए जाने का आश्वासन देते हुए मामले को शांत कराया गया. वहीं मौके पर मौजूद पुलिस मृतक बच्चे के परिवार के लोगों से मामले को लेकर जानकारी करते हुए जांच में जुटी हुई हैं. जिसके बाद पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया है. वही प्रशासनिक अधिकारियों ने अस्पताल को सील कर दिया है.

हैवी डोज से हुई मौत

वहीं इस मामले पर मृतक बच्चे के परिवारीजन लोकेश आर्य का कहना है कि उसके परिवार के एक बच्चे की पिछले 5 दिन से तबीयत खराब चल रही थी. जिस पर बच्चे का उपचार थाना क्वार्सी क्षेत्र के रामघाट रोड स्थित वाई के द्विवेदी अस्पताल में चल रहा था. आरोप है कि शुक्रवार को बच्चें को दस्त की शिकायत पर परिवार के लोग उसको अस्पताल लेकर पहुंचे. जहां डॉक्टर की गैर मौजूदगी में अस्पताल में तैनात कंपाउंडर के द्वारा बच्चें को दस्त होने की शिकायत पर दवाई देते हुए घर भेज दिया. लेकिन इसके कुछ घंटे बाद दस्त में दवाई से जब कोई आराम नहीं लगा तो परिवार के लोग बच्चें को दुबारा अस्पताल लेकर पहुंचे. जहां अस्पताल के कंपाउंडर ने बच्चें के दस्त रोकने के लिए दवाई दी. लेकिन इस दौरान बच्चें के दस्त में कोई आराम नहीं पड़ा. जिस पर परिवार के लोग उसको फिर अस्पताल लेकर पहुंचे. जहां कंपाउंडर ने दस्त की दवाई देते हुए कहा कि अगर इस दवाई से बच्चे को कोई फायदा नहीं पहुंचे तो इसका डबल डोज खिला देना. जिससे दस्त में फायदा मिलेगा. आरोप है कि दवाई की हैवी डोज देने के बाद बच्चे के दस्त तो बंद हो गए और उसको बुखार की शिकायत हो गई.

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पुलिस ने बच्चें के शव का भेजा पोस्टमार्टम के लिए

इस पर परिवार के लोग शनिवार की देर शाम करीब 7:00 बजे बच्चे को बुखार की शिकायत होने पर अस्पताल लेकर पहुंचे. जहां डॉक्टर की गैर मौजूदगी में कंपाउंडर ने बच्चें को दवाई देते हुए उसका उपचार शुरू कर दिया. कंपाउंडर द्वारा दी गई दवाई से बच्चे की तबीयत खराब होने लगी. इस पर बच्चें की तबीयत ज्यादा बिगड़ती हुई देख कंपाउंडर ने बच्चें के उपचार से अपना पल्ला झाड़ते हुए परिवार के लोगों को पास के ही दूसरे अस्पताल में तैनात डाक्टर अरविंद हरी गुप्ता के पास ले जाने की सलाह दी. आरोप है कि जैसे ही परिवार के लोग बच्चे को अस्पताल से लेकर बाहर निकले तभी बच्चे की मौत हो गई. बच्चें की मौत की सूचना मिलते ही परिवार के अन्य सदस्य भी मौके पर पहुंच गए.

मौके पर पहुंचे परिवार के लोगों ने दवाई की हैवीडोज देने वाले कंपाउंडर और अस्पताल प्रबंधन को बच्चें की मौत का जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई किए जाने को लेकर अस्पताल परिसर में हंगामा कर दिया. अस्पताल में बच्चें की मौत को लेकर किए जा रहे हंगामे की सूचना पर मौके पर पहुंचे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा मामले को शांत कराया गया. जिसके बाद मृतक बच्चे के पिता की तहरीर के आधार पर पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया. वहीं मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने अस्पताल को सील किए जाने की कार्रवाई की. जिसके बाद पुलिस ने बच्चें के शव का पोस्टमार्टम कराए जाने को लेकर मोर्चरी भेज दिया.

25 वर्षों से मरीजों का उपचार कर रहा हूं- कंपाउंडर

वहीं बच्चें की मौत के जिम्मेदार कंपाउंडर का कहना है कि डॉक्टर की गैर मौजूदगी में अस्पताल में आने वाले मरीजों का उसके द्वारा ही उपचार किया जा जाता है, और उसको अस्पताल में मरीज देखते देखते इतना एक्सपीरियंस हो गया है कि वह पिछले 25 वर्षों से मरीजों का उपचार कर रहा हूं? लेकिन में मानता हूं अस्पताल में बच्चें का कई दिन से उपचार चल रहा था. वहीं आज परिवार के लोग बच्चें की तबीयत ज्यादा खराब होने पर अस्पताल लेकर पहुंचे. जहां उसके द्वारा जब बच्चें को चेक किया गया तो उसको दिमागी बुखार था ओर उसके द्वारा बच्चें को कोई दवाई नहीं दी गई. वही परिवार के लोगों का आरोप है कि बच्चें को तेज बुखार में कंपाउंडर के द्वारा इंजेक्शन लगाया गया था यही वजह है कि डॉक्टर की गैर मौजूदगी में कंपाउंडर द्वारा दी गई दवाई की हैवी डोज और बुखार में इंजेक्शन लगाए जाने के चलते उसकी मौत हुई है.

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