Bhubaneswar News: राज्यभर में पेयजल समस्या के समाधान को कदम उठाने का निर्देश
Bhubaneswar News: जल सुरक्षा योजना की समीक्षा बैठक में वाटको को राज्यभर में पेयजल परियोजनाओं का काम तेज करने का निर्देश दिया गया.
Bhubaneswar News: भुवनेश्वर शहर एवं आसपास के क्षेत्रों के लिए तैयार जल सुरक्षा योजना की समीक्षा आवास एवं शहरी विकास विभाग की प्रधान सचिव उषा पाढ़ी ने खारवेल भवन में आयोजित बैठक में की. यह योजना ओडिशा जल निगम (वाटको ) द्वारा तैयार की गयी है.
वाटको के प्रबंध निदेशक ने शहर की वर्तमान जलापूर्ति स्थिति पर विस्तृत प्रस्तुति दी
समीक्षा के दौरान प्रधान सचिव ने भुवनेश्वर की तेजी से बढ़ती आबादी और भविष्य के शहरी विस्तार को ध्यान में रखते हुए सभी चल रही और प्रस्तावित जलापूर्ति परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिये. बैठक में अतिरिक्त सचिव सुभानंद मोहापात्र, वाटको के प्रबंध निदेशक देवव्रत मोहंती सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे. बैठक में वाटको के प्रबंध निदेशक ने शहर की वर्तमान जलापूर्ति स्थिति पर विस्तृत प्रस्तुति दी. इसमें मांग-आपूर्ति के अंतर, तथा विकसित ओडिशा@2036 और विकसित भारत@2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप प्रस्तावित बुनियादी ढांचा विस्तार योजनाओं की जानकारी दी गयी. परियोजना क्रियान्वयन में आ रही परिचालन एवं प्रशासनिक चुनौतियों पर भी चर्चा हुई, जिन्हें शीघ्र समाधान के लिए संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष उठाने का निर्णय लिया गया.
शहरी स्थानीय निकायों का व्यापक सर्वेक्षण करने का निर्देश
तेजी से हो रहे शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और मौसमी जल संकट को ध्यान में रखते हुए प्रधान सचिव ने वाटको को राज्य भर के शहरी स्थानीय निकायों का व्यापक सर्वेक्षण करने के निर्देश दिये. विशेष रूप से उन निकायों पर ध्यान केंद्रित किया जायेगा, जहां गर्मी के मौसम में गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न होता है. इस सर्वेक्षण के तहत जल स्रोतों की स्थिरता, शोधन एवं भंडारण क्षमता, वितरण दक्षता तथा चरम मौसमी मांग का आकलन किया जायेगा, जिससे लक्षित हस्तक्षेप, बेहतर आपात तैयारी और निवेश योजना संभव हो सके. गौरतलब है कि भुवनेश्वर नगर निगम क्षेत्र की आबादी वर्ष 2011 में 8.40 लाख से बढ़कर 2025 में अनुमानित 13.03 लाख हो चुकी है. वर्तमान में शहर की जल मांग 304 एमएलडी है, जबकि मौजूदा आपूर्ति क्षमता 238.50 एमएलडी है. इस प्रकार 65.50 एमएलडी का अंतर है, जिसकी पूर्ति फिलहाल भूजल स्रोतों के माध्यम से की जा रही है. शहर को जलापूर्ति महनदी, कुआखाई और दया नदियों से जुड़े छह जल शोधन संयंत्रों के माध्यम से की जा रही है.
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