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Tuesday, February 27, 2024

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ओडिशा : एक माह में 100 रुपए को 400 बनाने की लालच में बामड़ा ब्लॉक के 1015 लोगों ने करोड़ों गंवाए

बामड़ा प्रखंड गोबिंदपुर थाना अंचल में अक्टूबर 23 में साई ट्रेडिंग एप के जरिए निवेश शुरू हुआ था. निवेश से पहले कितना रकम वापस मिलेगा उसकी अग्रिम सूचना मिलती थी. न्यूनतम 100 रुपया निवेश करने पर महीने के अंत में 300 से 400 रुपये वापस मिलता था.

ओडिशा में संबलपुर जिले के बामड़ा प्रखंड में मोबाइल एप में ट्रेडिंग के नाम पर 1015 लोगों से पांच करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी का मामला आया है. इस ठगी के शिकार 30-40 लोगों ने संबलपुर साइबर थाने जाकर 50 लाख रुपया ठगी होने का शिकायत दर्ज करायी है. जानकारी के अनुसार सभी लोग साई ट्रेडिंग एप के जरिए निवेश करते थे.

22 जनवरी 2024 से एप से निकासी बंद

इस ट्रेडिंग एप का कारोबार अक्टूबर 2023 में शुरू हुआ था. एप में रुपया निवेश और निकासी की सुविधा रहती थी. 22 जनवरी 2024 को एप में रुपए की निकासी बंद हो गई. दो फरवरी को एप ने काम करना बंद कर दिया. एक पीड़ित ने बताया इस एप में बामड़ा प्रखंड के 1015 लोग जुड़े हुए थे. ठगी की रकम 20 लाख से ज्यादा होने से ओडिशा की संबलपुर साइबर थाना ने इओडब्लू में मामला दर्ज करने का सलाह दी है.

  • ठगी के शिकार लोगों ने संबलपुर साइबर थाना में दर्ज करायी प्राथमिकी

  • अक्तूबर 2023 में शुरू किया गया था यह ऐप

  • 22 जनवरी को एप से बंद हो गयी निकासी

अक्टूबर 23 में साई ट्रेडिंग एप के जरिए शुरू हुआ था निवेश

जानकारी के अनुसार बामड़ा प्रखंड गोबिंदपुर थाना अंचल में अक्टूबर 23 में साई ट्रेडिंग एप के जरिए निवेश शुरू हुआ था. निवेश से पहले कितना रकम वापस मिलेगा उसकी अग्रिम सूचना मिलती थी. न्यूनतम 100 रुपया निवेश करने पर महीने के अंत में 300 से 400 रुपये वापस मिलता था. स्थानीय युवकों ने एक व्हाट्स एप ग्रुप बनाया था और एप में निवेश करते थे. ग्रुप में 1015 लोग सदस्य थे.

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लालच में फंसते गए लोग

शुरू-शुरू में दुगुना तिगुना रुपया वापस मिलने की बात पता चलने पर निवेशकों की संख्या भी एक हजार से ऊपर हो गयी थी. कई लोगों ने तो तीन से चार लाख रुपया निवेश किया है. 22 जनवरी को एप में निकासी बंद होने और दो फरवरी को एप बंद होने से अंचल के हजारों निवेशकों का करोड़ों रुपया खतरे में पड़ गया है.

12 निवेशक शिकायत लेकर संबलपुर साइबर थाना पहुंचे

अंचल के 12 निवेशकों ने संबलपुर साइबर थाना जाकर लिखित शिकायत दर्ज करायी है. बाकी कई लोग लोक लाज से थाने जाने में कतरा रहे हैं. ठगी के शिकार गरपोश कुलीपाड़ा अंचल के दिगंबर रोहिदास पिछले अक्टूबर महीने से एप में निवेश कर रहे थे. एप बंद होने से उनके 78 हजार रुपया डूब गया है.

इस ठगी के शिकार करीब 50 लोग बामडा अंचल से आए थे जिनका करीब 30 लाख रुपया फंसा हुआ है. ठगी की रकम 20 लाख से अधिक होने से यह मामला सीआइडी क्राइम ब्रांच कटक में दर्ज होगा.

अमिय डुंगडुंग, संबलपुर साइबर क्राइम थाना अधिकारी

रिंकू नायक, रुद्रानारायण जयपुरिया,करुणाकर मेहर, सुबर्न नायक, सतीश कुमार साहू, बिरेंद्र पटेल, हरेंद्र पटेल, संजय बूडा, सुमित चौरसिया, मनोज नायक, दुष्मंत नायक, मनोज भोई, प्रकाश पटेल, जुई लारिया, राजेश मिंज, रूकेश सुनानी, कान्हा जयपुरिया, भवानी काक,चीकू बेसन, बिलासिनी कुआ, परमेश्वर लरिया, ममता कुआ, महेश्वर कुआ, बबलू कुआ और अन्य लोगों ने एप में निवेश किया था. इस ठगी में कई उच्च शिक्षित युवक, व्यापारी, गृहिणी, मजदूर हैं, जिन्होंने लालच में पड़कर अपनी जमा पूंजी भी इस एप में लगा दी थी. बहुत से लोग शर्म और लोकलाज के चलते में शिकायत करने में हिचक रहे हैं. ऐसी ठगी नयागढ़ जिले में भी हुई है.

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रकम दोगुनी कराने की लालच में हुए साइबर ठगी के शिकार

कहावत है कि लालच बुरी बला है. बामड़ा अंचल में करोड़ों रुपयों की साइबर ठगी के पीड़ित भी रकम दोगुनी कराने के लालच में ठगी का शिकार बने. इन पीड़िताें का कहना है कि बामड़ा ब्लाक के कुटारीमाल पंचायत के सर्गीडीही गांव के करुणाकर मेहेर ने कुछ युवाओं को ढाबा में शानदार दावत देने के साथ इस एप की जानकारी दी थी. उसने बताया था कि इस एप में निवेश करने से चंद दिनों में ही रकम दुगुनी हो जाती है. जिससे पहले किसी ने 300, 200, 500, 1000 समेत 12 हजार रुपये तक का निवेश किया था. जिसके बाद उनकी रकम दुगुनी होने से वे और भी ज्यादा रुपये लगाने लगे थे.

निवेशक लाने पर मिलता था कमीशन भी

इस एप में निवेश के साथ रुपये निकाले भी जा सकते थे. लेकिन गत अक्टूबर-2023 से यह एप शुरु होने के बाद गत 22 जनवरी को इस एप में निवेश तो मंजूर होता था. जबकि निकासी होनी बंद हो गयी थी. वहीं गत दो फरवरी से यह एप ही बंद हो जाने से लोगों को ठगे जाने का पता चला. इस एप में यदि कोई निवेशक अन्य किसी निवेशक को एप में निवेश के लिये राजी कर पाता था तो उसके एवज में उसे कमीशन भी मिलता था.

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