Shiv Sena: चुनाव चिह्न आवंटित होने के बाद गरजे एकनाथ शिंदे, कहा- हम दुष्टों का नाश करने वाली तलवार बनेंगे

चुनाव आयोग द्वारा उनके गुट को आवंटित चुनाव चिन्ह पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, यह 'दो तलवारें और ढाल' निशानी छत्रपति शिवाजी महाराज की निशानी है और लोग इसके बारे में जानते हैं. बालासाहेब के शिवसैनिक आज खुश हैं. हम इस चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे.

चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना के धड़े को मंगलवार को चुनाव चिह्न आवंटित कर दिया है. शिंदे गुट को दो तलवार और एक ढाल का निशान आवंटित किया. इधर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने चुनाव चिह्न मिल जाने पर अपनी खुशी जाहिर की ओर अपना बयान भी दिया. उन्होंने अपने विरोधियों को भी ललकारा और कहा, हम लड़ेंगे और जीतेंगे. मालूम हो चुनाव आयोग से शिंदे गुट को ‘बालासाहेबंची शिवसेना’ (बालासाहेब की शिवसेना) नाम आवंटित किया है.

छत्रपति शिवाजी महाराज की निशानी है ‘दो तलवारें और ढाल’: शिंदे

चुनाव आयोग द्वारा उनके गुट को आवंटित चुनाव चिन्ह पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, यह ‘दो तलवारें और ढाल’ निशानी छत्रपति शिवाजी महाराज की निशानी है और लोग इसके बारे में जानते हैं. बालासाहेब के शिवसैनिक आज खुश हैं. हम इस चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे. शिंदे ने कहा कि उनका समूह शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे द्वारा निर्धारित कट्टर हिंदुत्व विचारधारा के लिए सच्चा पथप्रदर्शक है. उन्होंने ट्वीट किया, हम निर्दोषों की रक्षा करने वाली ढाल और दुष्टों का नाश करने वाली तलवार बनेंगे.


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शिंदे गुट ने चुनाव आयोग को दिया था तीन चिह्न

शिंदे गुट ने चुनाव चिह्न के लिए ‘पीपल का पेड़’, ‘तलवार और ढाल’ तथा ‘सूर्य’ को विकल्प बताया था. आयोग ने शिंदे-समूह द्वारा दिए गए तीनों सुझावों को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि वे स्वतंत्र चुनाव चिह्नों की सूची में नहीं हैं. हालांकि, आयोग ने शिंदे के नेतृत्व वाले समूह को ‘दो तलवारें और एक ढाल’ चुनाव चिह्न आवंटित किया, यह देखते हुए कि यह शिंदे समूह द्वारा मांगी गई ‘ढाल-तलवार’ (ढाल और तलवार) से मिलता जुलता है. निर्वाचन आयोग ने कहा कि ‘दो तलवारें और ढाल’ का चिह्न पहले पीपुल्स डेमोक्रेटिक मूवमेंट को आवंटित किया गया था, जिसे 2004 में एक राज्य पार्टी के रूप में मान्यता दी गई थी और बाद में 2016 में उसे सूची से बाहर कर दिया गया था.

उद्धव गुट को चुनाव आयोग ने दिया उद्धव बालासाहेब ठाकरे नाम और मशान चिह्न

निर्वाचन आयोग ने उद्धव ठाकरे नीत गुट के लिए पार्टी के नाम के रूप में ‘शिवसेना – उद्धव बालासाहेब ठाकरे’ नाम आवंटित किया. जबकि ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना को ‘मशाल’ चुनाव चिह्न आवंटित किया है. आयोग ने धार्मिक अर्थों का हवाला देते हुए चुनाव चिह्न के रूप में ‘त्रिशूल’ की मांग करने के उद्धव गुट के दावे को खारिज कर दिया. शिंदे ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के खिलाफ बगावत करते हुए दावा किया था कि उनके पास शिवसेना के 55 में 40 विधायकों और 18 लोकसभा सदस्यों में से 12 का समर्थन प्राप्त है. उद्धव के इस्तीफे के बाद शिंदे ने भाजपा की मदद से सरकार बनाने हुए मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी.

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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