किसान की बेटी ने कड़ी मेहनत से अंतरराष्ट्रीय हॉकी में किया देश का नाम रोशन
– निसार/अनिल तिवारी –
जमशेदपुर/बंदगांव : बंदगांव की 18 वर्षीया बिगन सोय आज भले ही रातों–रात देश की स्टार हॉकी खिलाड़ी बन गयी है, लेकिन इसके पीछे इस झारखंडी बाला की अटूट मेहनत और लगन का नतीजा है. जब बिगन की सहेलियां गुड्डे–गुड़ियों से खेलती थी तब कक्षा दो से ही बिगन ने हॉकी स्टिक पर हाथ आजमाना शुरू कर दिया था.
शुरुआती दिनों में कोच बेला मुंडारी ने बिगन को हॉकी का ककहरा सिखाया तो साई सेंटर में आने के बाद फुलकारिया नाग ने उसे फारवर्ड से गोलकीपर बनने की सलाह दी. किसान पिता के हौसले ने बिगन की कल्पनाओं को उड़ान दी और आज बिगन राष्ट्रीय हॉकी के फलक पर छा गयी है.
रविवार को भारत की जूनियर महिला हॉकी टीम ने जूनियर विश्व कप में कांस्य पदक अपने नाम किया. इस कामयाबी की इबारत भले ही रानी ने अपने गोल की मदद से लिखी हो, लेकिन बंदगांव की बिगन सोय भी इस जीत की रियल हीरो थी. बंदगांव थाना क्षेत्र के कटूबा गांव की 18 वर्षीय बिगन सोय ने इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे स्थान के मुकाबले में अपने गोलकीपिंग से सभी का दिल जीत लिया.
बिगम सोय ने अपने शानदार डिफेंस के आगे अग्रेंजी पेनल्टी स्ट्रोक की एक न चलने दी. बिगन सोय की काबिलियत का पता इसी बात से चलता है कि जब मैच पेनाल्टी शूट आउट में पहुंचा तो उसने आठ में से छह शॉट रोक कर भारत को पहली बार कांस्य पदक दिला दिया.
बेला ने सिखायी हॉकी की एबीसीडी
महज कक्षा दो में ही बिगम सोय के सिर पर हॉकी का जूनून इस कदर सवार हुआ कि वह दिन के छह–सात घंटा अभ्यास करने लगी. उक्त बातें उनकी पहली कोच बेला मुंडारी ने बताया.
कक्षा आठ तक बंदगांव के कन्या आश्रम लुंबई बंदगांव स्कूल में पढ़ने वाली बिगम सोय को कक्षा दो से ही बेला मुंडारी ने हॉकी की ट्रेनिंग दी. बंदगांव के इस स्कूल में हर रोज सुबह दो घंटे और शाम दो घंटे लड़कियों को हॉकी की ट्रेनिंग दी जाती है. इस स्कूल के संरक्षक लोक सभा के उपाध्यक्ष करिया मुंडा है.
राइट हॉफ फारवर्ड से गोलकीपर तक : 2005 में पहली बार बिगन सोय बंदगांव के कन्या आश्रम को छोड़कर रांची में स्टेट ट्रॉयल में भाग लिया और उसका चयन टीम में हो गया.
इसके बाद बिगन को तराशने का काम बरियातू हॉकी सेंटर की कोच फुलकारिया नाग ने किया. फुलकारिया नाग ने बिगन को राज्य टीम में चुने जाने के बाद सलाह दी, कहा देखो राइट हॉफ फारवर्ड में फिलहाल चांस नहीं है तुम अपना ध्यान गोलकीपिंग पर दो. इसके बाद बिगन सोय ने गोलकीपिंग पर ध्यान केंद्रित करना शुरू किया और देखते ही देखते उसने अंतराष्ट्रीय स्तर पर झारखंड का नाम रौशन कर दिया.
राजकीय उच्च विद्यालय बरियातू (रांची) से कक्षा 10 तक की पढ़ाई पूरी कर चुकी बिगन के बारे उनकी कोच फुलकारिया नाग कहती हैं कि भविष्य में वह सीनियर टीम का भी प्रतिनिधित्व कर सकती है.
पिता करते हैं खेती बारी
बंदगांव थाना क्षेत्र के कटूबा गांव में बिगन सोय के पिता खेती बारी करके जीवन यापन करते हैं. बिगन के परिवार में दो भाई और एक बहन हैं. वहीं उनकी मां गृहणी हैं. बिगन के पिता नारा सोय ने कहा, ‘मैने अपनी बेटी को कभी भी हॉकी खेलने से मना नहीं किया. मुङो अपनी बेटी पर पूरा भरोसा था आज उसने मेरे विश्वास को सही साबित किया.’ बिगन के एक भाई रुसू सोय पुलिस में हैं.
