नोवामुंडी : समुदाय द्वारा प्रयोग में लायी जा रही पारंपरिक औषधीय प्रथाओं को मुख्यधारा में शामिल करने के प्रयास के तहत टाटा स्टील ने शनिवार को नोवामुंडी रिक्रिएशन क्लब में द्वितीय ग्रीन थेरेपी सेमिनार का आयोजन किया. ग्रीन थेरेपी बायोडायवर्सिटी और एथनोबॉटनिकल परम्पराओं पर केंद्रित कार्यक्रम है. कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिला परिषद सदस्य लक्ष्मी […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
नोवामुंडी : समुदाय द्वारा प्रयोग में लायी जा रही पारंपरिक औषधीय प्रथाओं को मुख्यधारा में शामिल करने के प्रयास के तहत टाटा स्टील ने शनिवार को नोवामुंडी रिक्रिएशन क्लब में द्वितीय ग्रीन थेरेपी सेमिनार का आयोजन किया. ग्रीन थेरेपी बायोडायवर्सिटी और एथनोबॉटनिकल परम्पराओं पर केंद्रित कार्यक्रम है. कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिला परिषद सदस्य लक्ष्मी सोरेन मुख्य अतिथि थीं. उन्होंने कहा कि प्रकृति के करीब रहने से न सिर्फ स्वस्थ रहने में मदद मिलती है,
बल्कि यह अपने तरीके से हमारी बीमारियों को ठीक कर देती है. टाटा स्टील ओएमक्यू डिवीजन के जीएम पंकज सतीजा ने कहा कि नोवामुंडी में हिबिस्कस पार्क को गत वर्ष हुए ग्रीन थेरेपी के मंथन का परिणाम बताते हुए दूसरे संस्करण के और उपयोगी होने का भरोसा जताया.
सेमिनार में महाराष्ट्र, ओडिशा और जमशेदपुर के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और अपने शोध कार्य प्रस्तुत किये. विशेषज्ञ सत्र के प्रतिभागी क्षेत्र के समुदाय की स्वदेशी वनस्पति वैद्यों की विशेषज्ञता से रूबरु हुए. तकनीकी सत्र में महाराष्ट्र की ‘ड्रीम’ संस्था के संस्थापक और निर्देशक गजानंद काले ने आदिवासी दवाइयों के विपणन तकनीक की जानकारी दी.