सिमडेगा: सेंट जेवियर्स कॉलेज, सिमडेगा में शनिवार को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा, अधिकार और जल, जंगल व जमीन के संरक्षण पर चर्चा हुई. कार्यक्रम में मानवाधिकार कार्यकर्ता और आदिवासी मामलों के विशेषज्ञ ग्लैडसन डुंगडुंग ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी संस्कृति, परंपरा और जल, जंगल व जमीन से जुड़ी है. अपनी पहचान और अधिकारों की रक्षा के लिए समाज के लोगों, विशेषकर युवाओं को जागरूक और संगठित होने की जरूरत है.
युवाओं से अधिकारों को समझने की अपील
कॉलेज हॉल में आयोजित कार्यक्रम में ग्लैडसन डुंगडुंग ने आदिवासी समाज की ऐतिहासिक विरासत, अधिकारों और वर्तमान चुनौतियों पर विचार रखे. उन्होंने युवाओं से अपने अधिकारों को समझने और सामाजिक बदलाव में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन का संरक्षण केवल प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा का विषय नहीं है, बल्कि यह आदिवासी समाज के अस्तित्व और पहचान से भी जुड़ा हुआ है.
संस्कृति और परंपरा से जोड़ना उद्देश्य
कार्यक्रम का आयोजन कॉलेज के एसटी/एससी सेल, इंडिजिनस क्लब और आईक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया. इसका उद्देश्य आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के साथ युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और विरासत से जोड़ना था.
कार्यक्रम में “हमारी संस्कृति–हमारा गौरव, हमारे अधिकार–हमारी पहचान” और “एकता में शक्ति–यही है हमारी शान” जैसे संदेशों के माध्यम से आदिवासी समाज की एकता, संस्कृति और पहचान को सहेजने का आह्वान किया गया.
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कॉलेज के प्राध्यापक रहे मौजूद
मौके पर कॉलेज के प्राचार्य डॉ. फादर रोशन बा, उप प्राचार्य फादर ब्रूनो टोप्पो, डॉ. फादर सुशील बिलुंग, एसटी/एससी सेल के समन्वयक डॉ. सुनील केरकेट्टा, सेल के सदस्य जस्टिन सोरेंग, जेसिका निधि तिग्गा, बिपिन मिंज और निशी तिर्की मौजूद थे.
