सिमडेगा. सिमडेगा कॉलेज के संस्कृत विभाग की ओर से संस्कृत दिवस, गुरु वंदन एवं नव-नामांकित विद्यार्थियों के स्वागत समारोह का आयोजन किया गया. इसमें संस्कृत भाषा के महत्व, भारतीय ज्ञान परंपरा, गुरु-शिष्य संबंध और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर विचार-विमर्श हुआ. समारोह में महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक और सैकड़ों विद्यार्थी उपस्थित थे. कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण, दीप प्रज्वलन एवं शांतिपाठ से हुआ. इसके बाद स्वागत गीत व वंदना प्रस्तुत की गयी.
गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय शिक्षा व्यवस्था की विशिष्ट पहचान
मुख्य अतिथि प्राचार्य प्रो देवराज प्रसाद ने कहा कि संस्कृत भारतीय ज्ञान, दर्शन, साहित्य एवं संस्कृति की समृद्ध परंपरा की आधारभूत भाषा है. इसके अध्ययन, संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी सभी की है. उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा को भारतीय शिक्षा व्यवस्था की विशिष्ट पहचान बताते हुए विद्यार्थियों से शिक्षकों के प्रति सम्मान बनाये रखने का आह्वान किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ जितेश पासवान ने की. उन्होंने कहा कि संस्कृत विद्यार्थियों को भाषा ज्ञान के साथ भारतीय चिंतन, जीवन-मूल्यों और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ती है. उन्होंने नवागंतुक विद्यार्थियों से शैक्षणिक व रचनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया.
कालिदास के नाटक और गुरु-शिष्य परंपरा पर प्रस्तुति
समारोह में विद्यार्थियों ने नृत्य, गीत, कविता-पाठ, श्लोक-पाठ और संस्कृत नाटक सहित विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं. कालिदास के नाटक और गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को आकर्षक बनाया. मंच संचालन दुर्गा कुमारी एवं अंजना डूंगडुंग ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन राधिका बड़ाइक ने किया. मौके पर प्रो विद्या शंकर कुमार, प्रो रीमा सुप्रिया कुजूर, प्रो उर्मिला देवी, प्रो ओलिव डूंगडुंग, प्रो संज्योति लकड़ा, डॉ सचिन साहू, प्रो चेतन सिंह मुंडा एवं प्रो कौशिक कुमार सहित अन्य शिक्षक उपस्थित थे.
