परिसीमन की आड़ में आदिवासी अधिकारों पर डाका पड़ा तो होगा बड़ा उलगुलान : भूषण बाड़ा

रांची के मोरहाबादी में विधायक भूषण बाड़ा ने आदिवासी महाजुटान रैली में परिसीमन और जमीन के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा। जानिए पूरी खबर।

रविकांत साहू की रिपोर्ट सिमडेगा. राजधानी रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में रविवार को परिसीमन के मुद्दे पर आयोजित आदिवासी महाजुटान रैली में बड़ी संख्या में लोग जुटे. पारंपरिक वेशभूषा और वाद्ययंत्रों के साथ पहुंचे लोगों को संबोधित करते हुए सिमडेगा विधायक भूषण बाड़ा ने आदिवासी अधिकार, जमीन और परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र सरकार और भाजपा की नीतियों पर तीखा हमला बोला.

आदिवासियों की चुप्पी का दौर अब खत्म

विधायक ने कहा कि आदिवासियों की चुप्पी का दौर अब खत्म हो चुका है. अपने अधिकारों की रक्षा के लिए पंचायत से संसद तक नया उलगुलान शुरू होगा. उन्होंने राज्य के सभी 13 अनुसूचित जिलों की लोकसभा, विधानसभा और पंचायत सीटों को शत-प्रतिशत आदिवासियों के लिए आरक्षित करने की मांग की. कहा कि जब जमीन आदिवासियों की है और नीतियां उनके हित में बननी हैं, तो कानून बनाने वाले जनप्रतिनिधि भी इसी माटी से होने चाहिए.

आदिवासियों के साथ जबरन बंध्याकरण

भूषण बाड़ा ने आदिवासी आबादी घटने के मुद्दे पर भी सवाल उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि आंकड़े बेहतर दिखाने के लिए आदिवासियों के साथ जबरन बंध्याकरण जैसी घटनाएं हुईं. उन्होंने कहा कि समाज अब अपने अधिकारों और आबादी को लेकर सजग है और किसी भी कीमत पर संख्या बल को कम नहीं होने देगा.

जमीन बाहरी लोगों को नहीं बेचने की अपील

उन्होंने आदिवासियों से चंद रुपयों के लालच में अपनी जमीन बाहरी लोगों को नहीं बेचने की अपील की. साथ ही शहरों में आदिवासियों के पुनर्वास और सुरक्षा की गारंटी की मांग की. गैर-आदिवासियों द्वारा आदिवासी बेटियों से शादी कर जमीन और आरक्षण का लाभ लेने के मामलों पर भी उन्होंने सख्त कानूनी रोक की मांग की.

'सरना बनाम ईसाई' विवाद से बचने की अपील

समाज में विभाजन के प्रयासों पर विधायक ने कहा कि 'सरना बनाम ईसाई' का विवाद खड़ा कर आदिवासियों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि सभी आदिवासियों की जड़ें और पुरखों का इतिहास एक है. समाज को एकजुट होकर अपने अस्तित्व और अधिकारों की रक्षा करनी होगी.

खनिज संसाधनों पर स्थानीय लोगों का अधिकार

विधायक ने जल, जंगल और जमीन के मुद्दे पर भी आवाज उठाई. उन्होंने कहा कि झारखंड के कोयला, लोहा, बॉक्साइट और यूरेनियम जैसे खनिज संसाधनों पर स्थानीय लोगों का अधिकार होना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि विस्थापन और बेरोजगारी के कारण बड़ी संख्या में युवा पलायन करने को मजबूर हैं.

अधिकारों पर डाका पड़ा तो होगा बड़ा उलगुलान

भूषण बाड़ा ने बिरसा मुंडा और सिदो-कान्हू के संघर्षों का हवाला देते हुए कहा कि यदि परिसीमन की आड़ में आदिवासियों की राजनीतिक सीटें और अधिकार कम करने की कोशिश हुई, तो झारखंड से उठी आवाज देशव्यापी जनांदोलन का रूप ले सकती है. उन्होंने पांचवीं अनुसूची को प्रभावी रूप से लागू करने और आदिवासी जमीन की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था बनाने की मांग की.

आदिवासी अधिकारियों की तैनाती की मांग

उन्होंने प्रशासनिक पदों पर भी स्थानीय आदिवासी अधिकारियों की तैनाती की मांग करते हुए कहा कि जल, जंगल और जमीन से जुड़े क्षेत्रों में बीडीओ, सीओ, एसपी और कलेक्टर जैसे पदों पर ऐसे अधिकारी होने चाहिए, जो स्थानीय संस्कृति और आदिवासी समाज की समस्याओं को समझते हों.

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बाहरी तत्वों से जमीन बचाने का आह्वान

विधायक ने झारखंड में सख्त स्थानीयता और जमीनों के सत्यापन अभियान की मांग की. उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्यों से आने वाले दलाल और बिचौलिए यदि फर्जी कागजात के सहारे आदिवासियों की जमीन पर कब्जा कर रहे हैं, तो उनकी पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए. भूषण बाड़ा ने कहा कि "माटी आदिवासियों की है तो राज भी आदिवासी करेगा. " उन्होंने आदिवासी समाज से एकजुट होकर अपनी जमीन, पहचान, आबादी और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया.

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