झारखंड का ये स्कूल बना मिसाल- गोबर से खाद, सोलर से ऊर्जा और ड्रॉपआउट बेहद कम, जानिए पूरी कहानी

सिमडेगा का जीयूपी हाई स्कूल केशलपुर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए राज्य स्तर पर सम्मानित हुआ है. जानें कैसे यह स्कूल बच्चों के लिए प्रेरणा बना है.

सिमडेगा. पाकरटांड़ प्रखंड अंतर्गत जी.यू.पी. हाई स्कूल, केशलपुर स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और बाल जागरूकता के क्षेत्र में जिले के लिए मिसाल बनकर उभरा है. विद्यालय को राज्य स्तर पर चार बार ‘मुख्यमंत्री स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार’ तथा केंद्र स्तर पर एक बार ‘स्वच्छ हरित विद्यालय रेटिंग’ से सम्मानित किया जा चुका है. राज्य स्तरीय पुरस्कार के रूप में विद्यालय को दो लाख रुपये की राशि भी प्राप्त हुई है.

गोबर और अंडे के छिलकों से तैयार की जाती है जैविक खाद

विद्यालय में प्रधानाध्यापक अमोद कुमार रंजन के नेतृत्व में 186 विद्यार्थियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण तैयार किया गया है. यहां गोबर और अंडे के छिलकों से जैविक खाद तैयार की जाती है. औषधि वाटिका के माध्यम से विद्यार्थियों को जैविक कीटनाशक बनाने का प्रशिक्षण भी दिया जाता है.

स्कूल में स्वच्छता के साथ कचरा प्रबंधन पर जोर

विद्यालय परिसर में स्वच्छ शौचालय, नियमित साफ-सफाई, आरओ फिल्टर से शुद्ध पेयजल और दीवारों, गेट व शौचालयों पर आकर्षक बाला पेंटिंग की व्यवस्था की गई है. मासिक धर्म अपशिष्ट के उचित प्रबंधन के साथ जैव-निम्नीकरणीय कचरे के निपटान की भी व्यवस्था है. परिसर में विकसित किचन गार्डन में बैंगन, टमाटर, केला और नींबू जैसी फसलों का उत्पादन किया जा रहा है.

सोलर पैनल से स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा

स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सोलर पैनल लगाए गए हैं. विद्यालय में नियमित रूप से ऊर्जा अंकेक्षण, जल अंकेक्षण और आपदा अंकेक्षण भी किया जाता है. इन प्रयासों से विद्यालय का वातावरण स्वच्छ एवं सीखने के अनुकूल बना है, जिसका सकारात्मक असर विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति पर भी देखने को मिल रहा है. विद्यालय में ड्रॉपआउट की दर भी बेहद कम है.

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बाल संरक्षण को लेकर भी जागरूकता

विद्यालय में विद्यार्थियों को बाल तस्करी और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के प्रति जागरूक किया जाता है. साथ ही अभिभावकों और ग्रामीणों को बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने तथा शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक किया जाता है. विद्यालय की इस पहल में पंचायत और पुरस्कार राशि से प्राप्त आर्थिक सहयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है. स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के साथ शिक्षा, बाल संरक्षण और सामुदायिक जागरूकता को जोड़कर केशलपुर विद्यालय ने एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है.

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