रविकांत साहू की रिपोर्ट दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में सिमडेगा जिले में हो रहे बदलाव की एक प्रेरक तस्वीर केरसेई प्रखंड के बकीकोना गांव में देखने को मिल रही है. कभी बिजली की सुविधा से वंचित रहा यह गांव आज सौर ऊर्जा के माध्यम से विकास और आत्मनिर्भरता की नई राह पर आगे बढ़ रहा है.
बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती थी
बकीकोना में लंबे समय तक 85 परिवार बिजली की सुविधा से वंचित थे. ग्रामीणों को रोशनी के लिए केरोसिन और सिंचाई के लिए डीजल पंप पर निर्भर रहना पड़ता था. इससे परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था, वहीं बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती थी. वर्ष 2025 में गांव में 17.98 किलोवाट क्षमता का सोलर माइक्रोग्रिड स्थापित किया गया. इसके बाद सभी 85 परिवारों के साथ प्राथमिक विद्यालय, सामुदायिक संस्थानों और पूरे टोले को बिजली की सुविधा उपलब्ध हो गई.
सौर ऊर्जा से आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति
सौर ऊर्जा ने केवल घरों को रोशन नहीं किया, बल्कि गांव की आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति दी. आज बकीकोना में सौर ऊर्जा से राइस हॉलर, आटा चक्की और पांच सिंचाई पंप संचालित हो रहे हैं. इससे किसानों को सिंचाई की सुविधा मिली है और कृषि कार्यों में डीजल पर निर्भरता कम हुई है. स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए अवसर भी विकसित हुए हैं.
बिजली आने से बच्चों की पढ़ाई और घरेलू सुविधाओं में सुधार हुआ
ग्रामीण श्रीमती माधुरी सामा मिंज के परिवार के लिए बिजली आने से बच्चों की पढ़ाई और घरेलू सुविधाओं में सुधार हुआ है. वहीं किसान इमैनुअल तिर्की के लिए सौर ऊर्जा ने सिंचाई को आसान बनाया और फसल विविधीकरण की संभावनाओं को मजबूत किया. इस बदलाव को धरातल पर उतारने में ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया ने स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. जिला प्रशासन, सिमडेगा के मार्गदर्शन, सहयोग और निरंतर समर्थन से यह पहल प्रभावी रूप से आगे बढ़ी. जिला प्रशासन के समन्वय तथा टीआरआई के तकनीकी एवं सामुदायिक सहयोग ने बकीकोना में स्थायी ऊर्जा समाधान को साकार किया.
सौर ऊर्जा ने रोजगार और आत्मनिर्भर्ता के नए रास्ते खोले
बकीकोना की कहानी बताती है कि जब प्रशासनिक प्रयास, तकनीकी सहयोग और समुदाय की भागीदारी एक साथ आती है, तो दूरस्थ गांवों में भी विकास की स्थायी रोशनी पहुंचाई जा सकती है. सौर ऊर्जा ने यहां सिर्फ अंधेरा दूर नहीं किया, बल्कि शिक्षा, कृषि, रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए रास्ते भी खोले हैं.
