बच्ची को हाथियों ने कुचल कर मार डाला

कोलेबिरा(सिमडेगा)अहले सुबह गांव में हाथियों ने हमला कियाभागने के दौरान बच्ची को सूंड़ से खींच लिया था दर्जनभर मकान क्षतिग्रस्त, फसल भी रौंदातीन दिन से डेरा जमाये है 16 जंगली हाथियों का झुंड फोटो: 14 एसआईएम: 10- मृतक बच्ची का शव, 11- बिलखते परिजन, 12- मुआवजा देते वन अधिकारी, 13, 14- ध्वस्त घर को दिखाते […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | October 14, 2014 12:33 PM

कोलेबिरा(सिमडेगा)अहले सुबह गांव में हाथियों ने हमला कियाभागने के दौरान बच्ची को सूंड़ से खींच लिया था दर्जनभर मकान क्षतिग्रस्त, फसल भी रौंदातीन दिन से डेरा जमाये है 16 जंगली हाथियों का झुंड फोटो: 14 एसआईएम: 10- मृतक बच्ची का शव, 11- बिलखते परिजन, 12- मुआवजा देते वन अधिकारी, 13, 14- ध्वस्त घर को दिखाते लोग.प्रतिनिधिप्रतिनिधि, कोलेबिरा मंगलवार को अहले सुबह लगभग तीन बजे हाथियों ने रैंसिया पंचायत अंतर्गत गवरलेटा ग्राम में एक आठ वर्षीय बच्ची प्रियंका कुमारी को कुचल कर मार डाला. प्रियंका के पिता रघुनाथ सिंह व ग्रामीणों ने बताया कि सुबह हाथियों ने गांव में हमला बोल कर मेधू सिंह, ललित जोजो एवं रघुनाथ सिंह का घर तोड़ना शुरू कर दिया. घर टूटता देख रघुनाथ सिंह अपनी पत्नी व बच्चों के साथ बाहर भागे. प्रियंका उन्हीं के गोद में थी, लेकिन हाथियों ने प्रियंका को सूंड़ से खींच लिया. हाथियों ने रघुनाथ पर भी हमला किया, किंतु रघुनाथ किसी तरह बच निकले. उसके बाद हाथियों ने बच्ची को पैरों तले कुचल-कुचल कर मार डाला. इतने में भी हाथियों का गुस्सा ठंडा नहीं हुआ. हाथियों ने कई मकानों में तोड़-फोड़ किया. रमेश मांझी, रामेश्वर नायक, बलकू मांझी, मुकुंद मांझी व जगनू मांझी के खेतो में लगी फसल को पूरी तरह नष्ट कर दिया. मालूम हो कि पिछले 11 अक्तूबर से प्रखंड में डेरा जमाये 16 जंगली हाथियों का झुंड लगातार तबाही मचा रहा है. वन अधिकारी ने दौरा कियाघटना की जानकारी मिलने के बाद वन पदाधिकारियों ने क्षेत्र का दौरा किया और घटना की जानकारी ली. इधर कोलेबिरा पुलिस ने बच्ची के शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया. वन पदाधिकारी विनोद कुमार उरांव ने मृतक के पिता को सरकारी सहायता के रूप में 20 हजार रुपए नकद दिये. इधर पिछले तीन दिनों से प्रखंड के ग्रामीण रतजगा करने को विवश हैं, जबकि विभाग की ओर से हाथियों को भगाने की कोई कोशिश नहीं की जा रही है. इससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है. अभी हाथी टुटिकेल के समीप जंगल में डेरा जमाये हुए हैं.