हिमांशु गोप
Seraikela News (चांडिल): सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ और तिरुलडीह क्षेत्र में सुवर्णरेखा नदी से अवैध बालू खनन का कारोबार लगातार फैलता जा रहा है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के प्रतिबंध के बावजूद नदी घाटों से खुलेआम बालू की निकासी, भंडारण और परिवहन हो रहा है. रात होते ही हाइवा, ट्रैक्टर और टिपर बालू लेकर झारखंड के विभिन्न जिलों के साथ पश्चिम बंगाल के लिए रवाना हो जाते हैं. इससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, जबकि ग्रामीण सड़कें भी तेजी से जर्जर होती जा रही हैं.
शाम ढलते ही सक्रिय हो जाता है बालू का नेटवर्क
ग्रामीणों के अनुसार दिन में ट्रैक्टरों से नदी घाटों से बालू निकालकर विभिन्न डंपों में जमा किया जाता है. शाम होते ही तिरुलडीह, ईचागढ़ और आसपास के डंपों से हाइवा और टिपरों में बालू लोड कर जमशेदपुर, आदित्यपुर, रांची, चाईबासा, चक्रधरपुर और पश्चिम बंगाल भेजा जाता है. सिल्ली-रांगामाटी, चौका-ईचागढ़, रड़गांव-खरसावां तथा आदारडीह-मिलन चौक मार्ग रातभर भारी वाहनों की आवाजाही से व्यस्त रहते हैं.
कई घाटों से हो रही अवैध निकासी
स्थानीय लोगों का कहना है कि सुवर्णरेखा नदी के जारगोडीह, बीरडीह, बामुनडीह, रायडीह, हाड़ात, तिरुलडीह, चान्हो और सपादा घाटों से प्रतिदिन बड़े पैमाने पर बालू निकाली जा रही है. इन घाटों के पास अस्थायी डंप बनाकर रात में भारी वाहनों से इसकी ढुलाई की जाती है.
पश्चिम बंगाल में दोगुनी कीमत, इसलिए बढ़ रहा कारोबार
जानकारी के अनुसार चांडिल, नीमडीह और कुकड़ू क्षेत्र में एक हाइवा बालू 28 से 30 हजार रुपये तक बिकता है, जबकि यही बालू पश्चिम बंगाल के बलरामपुर, श्यामनगर, बागमुंडी और बड़ाबाजार क्षेत्रों में 50 से 60 हजार रुपये प्रति हाइवा तक पहुंच जाता है. अधिक मुनाफे के कारण अवैध कारोबार लगातार बढ़ रहा है.
300 से अधिक अवैध डंप होने का दावा
ग्रामीणों का दावा है कि क्षेत्र में करीब 30 वैध बालू डंप हैं, जबकि 300 से अधिक अवैध डंप संचालित हो रहे हैं. इन्हीं डंपों से रात के समय बड़े पैमाने पर बालू की आपूर्ति की जाती है. लोगों का कहना है कि यदि इन डंपों पर प्रभावी कार्रवाई हो, तो अवैध खनन पर काफी हद तक रोक लग सकती है.
ओवरलोड वाहनों से सड़कें हो रहीं जर्जर
बालू ढुलाई में लगे ओवरलोड हाइवा और ट्रैक्टरों से ग्रामीण सड़कें जगह-जगह टूट चुकी हैं. तेज रफ्तार भारी वाहनों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है. ग्रामीणों का आरोप है कि कई ट्रैक्टर बिना वैध कागजात और ड्राइविंग लाइसेंस के भी संचालित हो रहे हैं, लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं होती.
पर्यावरण पर भी पड़ रहा असर
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रहे अनियंत्रित बालू खनन से सुवर्णरेखा नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है. इससे भविष्य में नदी के जल प्रवाह, भूजल स्तर और आसपास के पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है.
नए एसपी से लोगों को उम्मीद
स्थानीय लोगों ने जिले के नए पुलिस अधीक्षक मनोज स्वार्गियारी से अवैध बालू खनन, भंडारण और परिवहन के खिलाफ विशेष अभियान चलाने की मांग की है. उनका कहना है कि प्रभावी कार्रवाई से सरकारी राजस्व की क्षति रुकेगी, सड़कें सुरक्षित रहेंगी और नदी का प्राकृतिक संतुलन भी बचाया जा सकेगा.
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