शचिंद्र कुमार दाश
Kharsawan: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित योगीराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित ‘पुरवाई लोक कला उत्सव’ में सरायकेला छऊ नृत्य की भव्य प्रस्तुति ने दर्शकों का दिल छू लिया. इस कार्यक्रम का आयोजन पुरवाई कला, राजकीय बौद्ध संग्रहालय और संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में हुआ था. कार्यक्रम में छऊ गुरु तपन कुमार पटनायक की टीम ने विविध नृत्य प्रस्तुत किए, जिनमें प्रमुख थे ‘हर-पार्वती’, ‘रात्रि’, ‘राधा-कृष्ण’, ‘आरती’, ‘नाविक’, ‘उरुभंग’ और ‘दुर्गा’. इन नृत्यों ने दर्शकों को न केवल भारतीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया, बल्कि पौराणिक और सामाजिक तत्वों पर आधारित प्रभावशाली प्रस्तुतियां भी दीं.
पारंपरिक वेशभूषा, मुखौटे और दमदार नृत्य-भंगिमाएं छऊ नृत्य की समृद्ध परंपरा को जीवित रखती हैं, जिसने उपस्थित सभी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. कार्यक्रम की खासियत यह भी रही कि यह न केवल कला का प्रदर्शन था, बल्कि छऊ नृत्य की रिवायती ताकत और सांस्कृतिक धरोहर को साझा करने का भी एक महत्वपूर्ण अवसर था.
गुरु तपन कुमार पटनायक को सम्मान
कार्यक्रम के दौरान गुरु तपन कुमार पटनायक को उनके योगदान के लिए ‘पुरवाई लोक कला सम्मान’ से नवाजा गया. यह सम्मान उनकी कला और छऊ नृत्य के प्रचार-प्रसार में योगदान के लिए था.
सरायकेला के कलाकारों ने बढ़ाया झारखंड का मान
इस प्रस्तुति में संजय कुमार कर्मकार, गोपाल पटनायक, गणेश परिछा, मो. दिलदार, निवारण महतो, राजतेंदु रथ, सनत कुमार साहू, कुसमी पटनायक, परी, विजय सरदार, बैसाखू सरदार, बाबूराम सरदार, तरुण कुमार भोल, पूर्ण चंद्र सरदार, गोपबंधु तांती, सुदीप कुमार घोड़ाई और दशरथ महतो सहित कुल 18 कलाकार शामिल थे.
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