खरसावां.
गर्मी की दस्तक के साथ ही खरसावां और कुचाई प्रखंड के ग्रामीण इलाकों में पेयजल की समस्या विकराल रूप धारण करने लगी है. कहीं चापाकल दम तोड़ चुके हैं, तो कहीं लाखों की लागत से बनी जलमीनारें सफेद हाथी साबित हो रही हैं. एक ओर जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार विभाग की संवेदनहीनता चरम पर है.बंद मिला पीएचइडी कार्यालय
गुरुवार को जनता की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद खरसावां प्रखंड प्रमुख मनेंद्र जमुदा ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (पीएचइडी) के कार्यालय का औचक निरीक्षण किया. प्रमुख तब दंग रह गए जब कार्यालय के मुख्य द्वार पर ताला लटका मिला. हैरानी की बात यह है कि कार्यालय बंद होने की कोई पूर्व सूचना या नोटिस भी चस्पा नहीं किया गया था. हाइस्कूल चौक स्थित विभाग के कार्यालय में आलम यह है कि कनीय अभियंता और सहायक अभियंता उपस्थित नहीं रहते हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि कभी-कभार केवल चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी ही बाहर बैठे दिखते हैं, जिनके पास समस्याओं का कोई समाधान नहीं होता है.ग्रामीणों की मांगें
–शिकायत
नंबर किया जाए सार्वजनिक:
लोगों का कहना है कि जब कार्यालय बंद रहता है, तो वे अपनी बात किसके पास रखें. विभाग एक आधिकारिक मोबाइल नंबर जारी करे जिस पर सीधे शिकायत दर्ज हो सके.
–पुरानी
व्यवस्था की बहाली:
ग्रामीणों के अनुसार दो साल पहले तक शिकायत दर्ज कराने की बेहतर व्यवस्था थी, जिसे अब बंद कर दिया गया है.
–खराब
चापाकलों की मरम्मत:
गर्मी बढ़ने से पहले बंद पड़े चापाकलों और जलमीनारों को तत्काल चालू किया जाए.
– जनता की समस्याओं के समाधान के लिए बना कार्यालय इस तरह बंद रहना घोर लापरवाही है. पीएचइडी कार्यालय अक्सर बंद रहने की शिकायतें मिल रही हैं. मैं इस मामले में जिले के उपायुक्त से लिखित शिकायत करूंगा, ताकि दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो.