Illegal Sand Mining: झारखंड के चांडिल अनुमंडल में इन दिनों अवैध बालू का कारोबार एक बार फिर चरम पर है. जिला प्रशासन और उपायुक्त की सख्ती के दावों के बावजूद तिरुलडीह और ईचागढ़ के नदी घाटों से बालू की लूट मची है. हालांकि, कहने के लिए तो यहां पर तीन चेकनाका लगे हैं, लेकिन ये सभी हाथी दांत ही साबित हो रहे हैं. आलम यह है कि शाम ढलते ही सैकड़ों हाईवा अवैध बालू लादकर रांची, जमशेदपुर और पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के लिए कूच कर रहे हैं. बालू का अवैध परिवहन रोकने के लिए उपायुक्त के निर्देश पर ईचागढ़ थाना के गौरांगकोचा, टीकर और झाड़ुआ मोड़ पर बैरियर लगाये गए थे. शुरुआत में यहां दंडाधिकारी और पुलिस बल की तैनाती थी, पर अब हालात बदल चुके हैं.
सुरक्षा व्यवस्था नदारद
तीनों स्थानों पर बैरियर तो हैं, पर वहां तैनात रहने वाले दंडाधिकारी और पुलिस बल गायब रहते हैं. रिवहन: सुरक्षाकर्मियों के हटते ही बालू तस्कर सक्रिय हो जाते हैं. अब दिन के उजाले में भी बेरोकटोक बालू लदे वाहन गुजर रहे हैं. सूत्रों की मानें तो इस पूरे खेल के पीछे एक बड़ी सिंडिकेट काम कर रही है, जो पूरे सिस्टम को मैनेज करती है. प्रत्येक हाइवा में क्षमता से 200 से 300 सीएफटी अतिरिक्त बालू बिना किसी वैध चालान के ढोया जा रहा है. तिरुलडीह से निकलने वाला यह बालू पश्चिम बंगाल के पुरुलिया, बलरामपुर, बाराबाजार और पटमदा क्षेत्र में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है.
पीएम और अबुआ आवास के नहीं मिल रहा बालू
एक तरफ सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है, तो दूसरी तरफ स्थानीय लोग दाने-दाने को मोहताज हैं. पीएम आवास और अबुआ आवास के लाभार्थियों को निजी निर्माण के लिए बालू नहीं मिल पा रहा है. ग्रामीणों को प्रति ट्रैक्टर 4 से 4.5 हजार रुपये और प्रति हाइवा 25 से 30 हजार रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं.
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इन घाटों पर हो रहा अवैध उत्खनन
अवैध उत्खनन के मुख्य केंद्र सुवर्णरेखा नदी के विभिन्न घाट बने हुए हैं. ईचागढ़ के जारगोडीह सोड़ो, बीरडीह, बामुनडीह और रायडीह घाट, तिरुलडीह क्षेत्र में तिरुलडीह, सपादा, सपारुम और पैलोंग नदी घाट. यहां से ट्रैक्टरों के जरिए पहले सुरक्षित स्थानों पर बालू का भंडारण किया जाता है और फिर शाम को हाइवा के जरिए इसकी तस्करी की जाती है.
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