सरायकेला: सरायकेला प्रखंड अंतर्गत कुदरसाई गांव में प्रस्तावित क्रेशर प्लांट को लेकर विवाद दिन-प्रतिदिन गहराता जा रहा है. कंपनी प्रबंधन और ग्रामीण दोनों अपने-अपने रुख पर पूरी तरह अड़े हुए हैं. इस बीच, प्लांट को लेकर उपजे असंतोष को शांत करने के उद्देश्य से कंपनी द्वारा ग्रामीणों की एक आमसभा बुलाई गयी थी, जिसमें भोजन की भी विशेष व्यवस्था की गयी थी. हालांकि, ग्रामीणों ने इस आमसभा में शामिल होने से साफ इंकार कर दिया और कड़ा विरोध जताया.
कंपनी पर प्रलोभन देने का गंभीर आरोप
कुदरसाई, नातीडीह और पारलपोशी गांव के ग्रामीणों ने एकजुट होकर कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. ग्रामीणों का आरोप है कि आमसभा के नाम पर कंपनी की ओर से खाने-पीने की व्यवस्था कर उन्हें प्रलोभन देने का प्रयास किया गया, जिसे उन्होंने सिरे से ठुकरा दिया. प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने मुख्य सड़क पर ही कंपनी मालिक अनिल खिरवाल को रोककर दो टूक शब्दों में कह दिया कि वे किसी भी कीमत पर अपने इलाके में प्लांट नहीं लगने देंगे.
उपायुक्त को पहले ही सौंपा जा चुका है ज्ञापन
इससे पहले 14 जुलाई को ही ग्रामीणों ने सरायकेला-खरसावां के उपायुक्त, अंचलाधिकारी, खनन विभाग और बीडीओ को संयुक्त रूप से ज्ञापन सौंपकर प्लांट के अधिष्ठापन पर रोक लगाने की मांग की थी. ग्रामीणों का दावा है कि 1 अगस्त को आयोजित ग्रामसभा में समोसा, लड्डू और 200 रुपये नकद के साथ-साथ पक्का आवास दिलाने का झूठा आश्वासन देकर धोखे से उनकी सहमति ली गयी थी.
स्कूलों के पास प्लांट स्थापना पर स्वास्थ्य की चिंता
ग्रामीणों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रस्तावित स्थल के महज 500 मीटर के दायरे में केंद्रीय विद्यालय समेत तीन विद्यालय और दो आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं. प्लांट से उड़ने वाली धूल से स्कूली बच्चों और घनी आबादी के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ेगा तथा आसपास की उपजाऊ कृषि भूमि बंजर हो जायेगी. कंपनी मालिक अनिल खिरवाल का कहना है कि जमीन पूरी तरह निजी है और प्लांट सभी नियमों के तहत प्रदूषण रहित तरीके से चलाया जाएगा, जिससे क्षेत्र में समृद्धि आएगी. फिलहाल मामला तूल पकड़ चुका है और ग्रामीण हरियाली बचाने की जिद पर अड़े हैं.
क्या कहते है ग्रामीण
सुशील कुमार तियू ने क्रेशर प्लांट का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि गांव और यहां के ग्रामीणों के बेहतर भविष्य के लिए इस प्लांट का विरोध किया जा रहा है. प्लांट स्थापित होने के बाद भारी-भरकम गाड़ियों का परिचालन शुरू होगा, जिससे यहां के बच्चों और बुजुर्गों के लिए हमेशा खतरा बना रहेगा. इसके अलावा, प्लांट में होने वाली ब्लास्टिंग से घरों में दरारें आएंगी, जिससे जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है.
ग्रामीणों के विरोध को और स्पष्ट करते हुए कमल कुदादा ने कहा कि हमारा गांव अपनी हरियाली और शुद्ध वातावरण के लिए जाना जाता है, और इसे अपने मूल स्वरूप में ही रहना चाहिए. हम किसी भी कीमत पर गांव के भविष्य के साथ कोई सौदा नहीं करेंगे. प्लांट के निर्माण और खनन कार्यों से इंसानी स्वास्थ्य को भारी नुकसान पहुंचेगा तथा क्षेत्र का जलस्तर भी तेजी से नीचे गिर जाएगा.
किसानों की चिंता जताते हुए लखींद्र नायक ने कहा कि इस गांव में मुख्य रूप से किसान निवास करते हैं और कृषि कार्य ही हमारी मुख्य पहचान है. प्लांट के बैठने से पर्यावरण के साथ-साथ कृषि कार्य सबसे अधिक प्रभावित होगा, जिससे यहां के किसानों का जीवन पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा.
