1972 में महज इतने रुपये खर्च कर विधायक बने थे गुलाब सिंह मुंडा, ऐसे होता था चुनाव प्रचार

Kharsawan Assembly Constituency Election: जिस समय गुलाब सिंह मुंडा निर्वाचित हुए थे उस समय उनकी उम्र 30 साल थी. अपने पुराने दिनों को याद कर गुलाब सिंह मुंडा ने बताया कि उस समय के चुनाव प्रचार में न तो अब की तरह ताम-झाम था और न ही लाउडस्पीकर और सोशल मीडिया के जरिये प्रचार होता था.

Kharsawan Assembly Constituency Election: बिहार विधानसभा के लिए हुए आम चुनाव में कुचाई के तिलोपोदा गांव निवासी गुलाब सिंह मुंडा खरसावां विस क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए थे. जिस समय गुलाब सिंह मुंडा निर्वाचित हुए थे उस समय उनकी उम्र 30 साल थी. चाईबासा के बागुन सुबरुई के नेतृत्व वाली झारखंड पार्टी के टिकट पर उन्होंने चुनाव लड़ा था. उन्होंने करीब ढाई हजार वोट से चुनाव में जीत दर्ज की थी. गुलाब सिंह मुंडा इलाके में गुलाब बाबू के नाम से विख्यात हैं. फिलहाल वो अपने कुचाई के तिलोपदा स्थित पैतृक आवास पर ही रहते है.

वन सोशल मीडिया था और न थे इतने संसाधन- गुलाब सिंह मुंडा

पुराने दिनों को याद कर गुलाब सिंह मुंडा बताते है कि उस समय के चुनाव प्रचार में न तो अब की तरह ताम-झाम था और न ही लाउडस्पीकर और सोशल मीडिया के जरिये प्रचार होता था. उस समय जनता से सीधा संपर्क पर ज्यादा जोर दिया जाता था. संसाधन सीमित होने के कारण इतने बड़े क्षेत्र को कवर करना भी आसान नहीं होता था. 70 के दशक में चुनाव प्रचार का साधन दीवार लेखन, पोस्टर-हैंडबिल और डोर टू डोर कैंपेनिंग था.

किराये के कार से करते थे प्रचार

82 वर्षीय गुलाब सिंह ने बताया कि जब वे खरसावां विस क्षेत्र से चुनावी मैदान में थे, तो उनके पास भी संसाधन बहुत कम थे. नामांकन से पहले अपनी पुरानी बाइक और कभी अपनी साइकिल से घूम-घूमकर जन संपर्क करते थे. नामांकन के बाद चुनाव प्रचार के लिये चाईबासा से एक एंबेसडर कार या जीप किराये पर लेना पड़ता था. फिर उस उसी गाड़ी से प्रचार करते थे. तब कार के लिये डीजल भी चाईबासा से लाना पड़ता था. सरायकेला या खरसावां में पेट्रोल-डीजल का पंप नहीं होता था. कुचाई और खरसावां के पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क नहीं होने के कारण साइकिल या फिर पैदल जाना होता था. चुनाव प्रचार के दौरान जिस गांव में शाम हो जाती थी, वहां के कार्यकर्ताओं के घर पर रात गुजारते थे.

गुलाब सिंह मुंडा का निवास स्थान

पहले अलग अलग विचारधारा वाले नेता भी एक-दूसरे का करते थे सम्मान

पूर्व विधायक गुलाब सिंह मुंडा बताते हैं कि 1972 के चुनाव में करीब दो-ढाई हजार रुपये खर्च कर चुनाव जीत गये थे. अब तो चुनाव प्रचार का तरीका ही बदल गया. चुनावों में लाखों रुपये खर्च हो रहे है. वोट के लिये नेता सच-झूठ बोल रहे हैं. आरोप-प्रत्यारोप में अभी काफी तल्खी देखी जा रही है. पहले ऐसा नहीं था. अलग-अलग विचारधारा वाले राजनीतिक दल के नेता-कार्यकर्ता भी एक दूसरे का सम्मान करते थे.

विधायक बनने के बाद वेतन और भत्ता के रूप में मिलते थे डेढ़ हजार रुपये

गुलाब सिंह मुंडा ने बताया कि चुनाव जीतने के बाद उन्हें वेतन और भत्ते के रूप में करीब डेढ़ हजार रुपये मिलते थे. विधायक फंड नहीं था. उस समय क्षेत्र भ्रमण मोटरसाइकिल या साइकिल से करते थे. विधायकों के अनुशंसा पर जाती व आवासीय प्रमाण पत्र बन जाते थे. छोटे-मोटे कामों के लिये लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने नहीं पड़ते है. गुलाब बाबू बताते है कि विधायक रहते हुए उनकी पत्नी का निधन हो गया. बच्चे छोटे थे. बच्चों के परवरिश की जिम्मेवारी थी. इसके बाद विस चुनाव नहीं लड़ा. खेती कर बच्चों को पढ़ाया.

गुलाब सिंह मुंडा ने कहा कि उन्होंने अपने विधायक के कार्यकाल में सिंचाई पर विशेष ध्यान दिया था. यहां के जन प्रतिनिधियों की आवाज पटना में कम सुनी जाती थी. राशि के अभाव में विकास कार्य भी कम होता था. झारखंड बनने के बाद विकास कार्यो में तेजी आयी है. परंतु इन 24 सालों में जितना विकास होना चाहिए था, उतना नहीं हो सका.

Also Read: jharkhand Election 2024: चुनाव में प्रत्याशियों ने झोंकी पूरी ताकत, कहीं सास-ननद कर रही प्रचार, कहीं प्रत्याशियों के पिता और बच्चे ने संभाला मोर्चा

Jharkhand Assembly Election 2024: BJP का दावा, 28 में 14 एसटी सीटें जीत रही पार्टी, देखें वीडियो

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >