Seraikela Kharsawan News : केज पद्धति से मछली पालन शुरू

सीतारामपुर डैम. आठ मत्स्य पालक किसानों को उपलब्ध कराये गये 32 केज

सरायकेला-खरसावां. सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया अंचल स्थित सीतारामपुर जलाशय में पहली बार केज पद्धति से मत्स्यपालन हो रहा है. वित्तीय वर्ष 2024-25 में धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान योजना से आठ लाभुकों को 32 केज उपलब्ध कराये गये हैं. इसका मुख्य लक्ष्य मछली उत्पादन व उत्पादकता में गुणात्मक वृद्धि, तकनीकी, आधारभूत संरचना और मात्स्यिकी प्रबंधन की आधुनिकीकरण है. अनुदान राशि का 90 प्रतिशत (60 प्रतिशत केंद्र व 40 प्रतिशत राज्य) व शेष 10 प्रतिशत लाभुक अंशदान करते हैं. योजना से मत्स्य कृषकों को स्वावलम्बी/आत्मनिर्भर बनाना है.

2007 में विस्थापितों को मत्स्य पालन से जोड़ा गया :

करीब 70 हेक्टेयर में फैले सीतारामपुर जलाशय खरकई नदी किनारे निर्मित बांध है. इसका निर्माण सिंचाई विभाग ने वर्ष 1960 में कराया था. 1963 से जल संग्रहण शुरू हुआ. इसमें लगभग 10 गांवों के लगभग 1300 परिवार विस्थापित हुए थे. विस्थापितों के जीविकोपार्जन के लिए वर्ष 2007 में मछली पालन से जोड़ा गया. सीतारामपुर जलाशय में पूर्व से रिवराइन फिश फार्मिंग, मछली-सह बत्तख पालन, गिल नेट व पारंपरिक नाव योजना संचालित है. समिति को मछली की बिक्री के लिए 90 प्रतिशत अनुदान पर दो दोपहिया वाहन आइस बॉक्स के साथ व दो तीनपहिया वाहन आइस बॉक्स के साथ दिया जायेगा. धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान योजना से केज लगाने से मत्स्य उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ जलाशय में पर्यटन के नये आयाम खुलेंगे.

– रोशन कुमार, जिला मत्स्य पदाधिकारी, सरायकेला-खरसावां.B

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Author: ATUL PATHAK

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