नीमडीह : आदिम जनजातियों को नहीं मिल रही सरकारी सुविधाएं
चांडिल : सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल अंतर्गत नीमडीह प्रखंड के तेंतलो पहाड़धार के करीब 35 व डुमरडीह आगईडांगरा के पांच आदिम जनजति परिवार उपेक्षित का जीवन गुजार रहे हैं. इन सबर परिवारों का घर जर्जर हो गया है. इसके कारण कई सबर परिवार गांव से पलायन कर गये हैं. वे अपने रिश्तेदारों के यहां चले गये हैं.
वहीं यहां रह रहा परिवार सरकारी सुविधाओं से वंचित है. सबर परिवार पलास पत्ता की छावनी बनाकर जंगली की जिंदगी जी रहे हैं. धूप, बारिश व ठंड में सबर परिवार पेड़ के नीचे कपड़ा देकर सोते हैं. वर्षों पहले आदिम जनजाति के लोग जिस स्थिति में रहते थे, आज भी उसी स्थिति में हैं. आदिम जनजाति के लोगों तक सरकारी योजनाएं नहीं पहुंच रही हैं.
झरना का पानी पीने को विवश हैं सबर : तेंतलो सबर परिवार आज भी झरना का पानी पीने को विवश हैं. कई आदिम जनजाति के लोग गंभीर बीमारी के कारण जान गवां चुके हैं. कई परिवार बीमारी की चपेट में हैं. यही हाल रहा, तो आने वाले दिनों में आदिम जनजाति के लोग विलुप्त हो जायेंगे.
सबर, पहाड़िया व बिरहोर जंगल पर निर्भर : आदिम जनजाति के सबर, पहाड़िया व बिरहोर आज भी जंगल पर निर्भर हैं. आज भी जंगल से पत्ता, दातुन, सूखा लकड़ी आदि लाकर गांव-गांव में बेच कर अपना जीविका चलाते हैं. कुछ सबर रोजगार के तलाश में अन्य राज्यों में पलायन कर चुके हैं.
स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हैं सबर : दलमा के तराई में बसे तेंतलो व आगईडांगरा के सबर स्वास्थ्य सुविधा से वंचित हैं. स्वास्थ्य सेवा नहीं पहुंचने के कारण आदिम जनजाति के लोग आज भी जड़ी-बूटी से इलाज करते आ रहे हैं. कई सबर गंभीर बीमारी की चपेट में हैं.
समिति बनायेगी तेंतलो सबर बस्ती की जर्जर सड़क
तेंतलो सबर बस्ती की सड़क जर्जर है. सबर बस्ती तक आने के लिए रास्ता नहीं है. मंगलवार को चांडिल बांध विस्थापित मत्स्य जीवि सहकारी लि के अध्यक्ष नारायण गोप व सचिव श्यामल मार्डी तेंतलो पहाड़धार बस्ती पहुंचे. उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त मकान पीड़ितो के बीच तिरपाल वितरण किया. उन्होंने कहा कि गांव में सड़क बनायी जायेगी.
चांडिल व नीमडीह में कई आदिम जनजाति के युवक युवतियां मैट्रिक में उत्तीर्ण हुए हैं. सरकार के हिसाब से मैट्रिक युवक युवतियों को नौकरी में सीधी नियुक्ती है. कई शिक्षित युवक-युवती नौकरी से वंचित हैं. युवा जंगल से सूखी लकड़ी लाकर जीविका चला रहे हैं. सरकार और प्रशासन को ध्यान देने कि आवश्यकता है.
– मनोज कुमार सिंह, चांडिल कमल क्लब के प्रखंड अध्यक्ष
झारखंड सरकार कभी आदिम जनजाति के हित में नहीं सोची है. आदिम जनजाति के नाम पर सिर्फ राजनीति हुई है. आदिम जनजाति के परिवार तक सरकारी सुविधा नहीं पहुंच पा रही है. सबर, पहाडि़या, बिरहोर जाति के लोग स्वास्थ के कारण गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं. इसका सही से इलाज नहीं हो पा रहा है. शिक्षित लड़के लड़कियां जंगल से पत्ता, दातुन व लकड़ी बेचकर जीविका चला रहे है.
– सुकलाल पहाड़िया, पीटीजी डेवलपमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष
