बरसात के मौसम में बीमारियों का कहर बढ़ गया है, लेकिन साहिबगंज सदर अस्पताल की बदहाल व्यवस्था मरीजों के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं साबित हो रही है. 200 बेड वाली जिला सदर अस्पताल में रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं. उन्हें बुनियादी सुविधाएं तक नसीब नहीं हो पा रही हैं. बेड की कमी, बिस्तर और चादर के अभाव ने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है. सदर अस्पताल में प्रतिदिन ओपीडी में 200 से 300 मरीज आते हैं, इनमें से गंभीर मरीजों को भर्ती किया जाता है, लेकिन भर्ती होने के बाद भी कई मरीजों को बेड तो मिल जा रहा है पर बिस्तर और चादर नहीं मिल रहे.
अस्पताल प्रशासन का नियम है कि हर मरीज के लिए रोजाना बेड की चादर बदली जाए, लेकिन हकीकत इसके उलट है. बताया गया कि वार्ड में दर्जनों मरीज बिना चादर के ही लोहे के बेड पर लेटे हुए हैं कुछ मरीज अपने घर से चादर और बिस्तर लाकर किसी तरह अपना काम चला रहे हैं, जो मरीज दूर-दराज के गांवों से आए हैं, उनके पास चादर तक नहीं है. ऐसे में उन्हें बिना बिस्तर के ही दर्द में रात गुजारनी पड़ रही है. मरीजों का कहना है कि बेड मिला है यही बड़ी बात है, चादर मांगे तो कोई सुनता ही नहीं.
फर्श पर इलाज कर रही हैं गर्भवती महिलाएं
स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक प्रसूति वार्ड की है. बरसात में डिलीवरी और अन्य बीमारियों के केस बढ़ गए हैं, लेकिन बेड की संख्या उतनी ही है. पर्याप्त बेड नहीं होने के कारण कई गर्भवती महिलाओं को फर्श पर ही गद्दा बिछाकर इलाज दिया जा रहा है. फर्श पर नमी और गंदगी के कारण संक्रमण का खतरा भी बना हुआ है. एक महिला मरीज के परिजन ने बताया कि दर्द से तड़प रही थी, लेकिन बेड खाली नहीं था मजबूरन जमीन पर ही लिटा दिया गया. कुछ स्थिति में तो नीचे पुरुषों वाली वार्ड को खाली करा कर तत्काल उसे वहां रहने की व्यवस्था दी जा रही है.
संक्रमण का बढ़ रहा खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बिना चादर और गंदे बेड पर इलाज कराने से मरीजों में संक्रमण फैलने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है. बरसात में पहले से ही वायरल के केस बढ़े हुए हैं. अस्पताल में सफाई कर्मचारियों की भी कमी है, जिस कारण वार्ड और टॉयलेट की साफ-सफाई भी ठीक से नहीं हो पा रही है.
अधिकारी निरीक्षण करते हैं, व्यवस्था नहीं बदलती
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारी सीएस, डीएस व अन्य प्रतिदिन सदर अस्पताल का निरीक्षण करते हैं. निरीक्षण के दौरान रिपोर्ट बनती है, लेकिन जमीनी हकीकत नहीं बदलती. मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि अधिकारी सिर्फ कागजों में व्यवस्था ठीक दिखाते हैं. स्थानीय लोगों ने मांग की है कि बरसात के सीजन को देखते हुए अस्पताल में अतिरिक्त बेड, बिस्तर और चादरों की तुरंत व्यवस्था की जाए. साथ ही सफाई कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ाई जाए.
क्या कहते है सीएस
साहिबगंज के सीएस डॉ रामदेव पासवान ने कहा सदर अस्पताल में चादर व बेड की कमी नहीं है. फिर भी अगर बिना चादर के कोई मरीज है तो जांच कर कार्रवाई की जायेगी. एक सप्ताह के अंदर सभी व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त कर लिया जायेगा.
