जांच छोटी-बड़ी, बिल हजारों का! बरहेट में पैथोलॉजी सेंटरों की मनमानी पर उठे सवाल

बरहेट और आसपास के इलाकों में पैथोलॉजी सेंटर मरीजों को लूट रहे हैं. साधारण जांचों के नाम पर हजारों रुपये वसूले जा रहे हैं, जबकि कर्मियों की योग्यता पर भी सवाल उठ रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग ने जांच और सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है.

बरहेट से नागराज साह की रिपोर्ट

बरहेट, पतना : बरहरवा प्रखंड मुख्यालय और आसपास के इलाकों में इन दिनों अवैध पैथोलॉजी सेंटर मरीजों के लिए राहत के बजाय आफत बन चुके हैं. स्वास्थ्य व्यवस्था के नियमों को ताक पर रखकर चलाये जा रहे इन सेंटरों में मरीजों से खून और यूरिन जांच के नाम पर मनमाना पैसा वसूले जाने की शिकायत सामने आ रही है. ग्रामीणों की शिकायत है कि सीबीसी, शुगर, थायराइड, एलएफटी और केएफटी जैसी बेसिक जांचों का पैकेज बनाकर मरीजों से 3,000 से 6,000 रुपये तक लिये जा रहे हैं.

कर्मियों की योग्यता पर सवाल

पतना, बरहरवा के अलावा बरहेट प्रखंड के बरहेट बाजार अस्पताल रोड, शिवगादी चौक, कदमा, पंचकठिया बाजार, तलबड़िया और कुसमा बाजार में संचालित पैथोलॉजी सेंटरों में काम करने वाले तकनीकी कर्मियों की योग्यता और आवश्यक स्टाफ की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं. सूत्रों के अनुसार, कई केंद्र बिना किसी मान्यता प्राप्त डिग्रीधारी डीएमएलटी/बीएमएलटी तकनीशियन या नर्सिंग स्टाफ के संचालित होने का आरोप है. अप्रशिक्षित कर्मियों द्वारा दी जा रही जांच रिपोर्ट की गुणवत्ता और सटीकता पर भी सवाल उठाये जा रहे हैं.

बिना पैथोलॉजिस्ट रिपोर्ट का आरोप

नियमों के मुताबिक किसी भी पैथोलॉजी लैब की रिपोर्ट पर एमडी पैथोलॉजिस्ट का हस्ताक्षर होना अनिवार्य है. लेकिन आरोप है कि कई सेंटरों में लैब बॉय या अप्रशिक्षित कर्मी ही खून निकालने के साथ रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं. आरोप है कि बिना जांच-परख के दी जा रही इन रिपोर्टों के आधार पर मरीजों का इलाज हो रहा है.

रेट चार्ट नहीं, 3 से 6 हजार तक वसूली

स्थानीय लोगों का आरोप है कि किसी भी सेंटर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा निर्धारित शुल्क की सूची यानी रेट लिस्ट नहीं लगाई गई है. ग्रामीणों और मरीजों का आरोप है कि सीबीसी, हीमोग्लोबिन, शुगर, लिवर फंक्शन टेस्ट, किडनी फंक्शन टेस्ट, थायराइड, लिपिड प्रोफाइल, मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड और यूरिन टेस्ट जैसी जांचों के नाम पर मरीजों से 3 से 6 हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं.

बिल नहीं देने का भी आरोप

मरीजों का आरोप है कि उन्हें न तो पक्का बिल दिया जाता है और न ही जांच की वास्तविक कीमत बतायी जाती है. ग्रामीण इलाकों में फैले डॉक्टरों के कथित कमीशन नेटवर्क के कारण गरीब मरीज इन सेंटरों के जाल में फंसने को मजबूर हैं.

लाइसेंस और योग्यता जांच की मांग

लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को इन सभी सेंटरों की कड़ाई से जांच करनी चाहिए. विभाग द्वारा निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौन से केंद्र नियमों के अनुरूप चल रहे हैं और कहां अनियमितता बरती जा रही है. ग्रामीणों ने सभी निजी जांच केंद्रों के क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन, संचालकों की योग्यता और उपकरणों के मानकों की जांच की मांग की है.

क्या कहते हैं सिविल सर्जन

साहिबगंज सिविल सर्जन डॉ. रामदेव पासवान ने कहा कि जिले में बिना निबंधन और मानकों की अनदेखी कर संचालित हो रहे पैथोलॉजी सेंटरों की जांच की जायेगी. साथ ही मनमाना शुल्क वसूलने वाले पैथोलॉजी केंद्रों के विरुद्ध विभाग सख्त कार्रवाई शुरू करेगा.

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लेखक के बारे में

By Vikash Jaiswal

विकास जायसवाल तिलका मांझी विश्वविद्यालय, भागलपुर से पढ़ाई पूरी करने के बाद पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। जनसरोकार, खोजी खबरों, सामाजिक मुद्दों, क्राइम और स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाने में अनुभवी हैं।

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