साहिबगंज : विश्ववानिकी दिवस के अवसर पर प्रमंडल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू ने जनजातिय समुदाय को संबोधित करते हुये कहा कि आदिवासी समाज जो आज भी जंगल पहाड़ों पर रहते हैं वो प्योर, प्लीज्ड व पीस हैं. यह समाज आज भी कम संसाधन में ही जीते है.
वन और पर्यावरण को आज भी आदिवासी समाज भगवान के तरह पूजते हैं. इसके पास दो पीढ़ा और एक खटिया होता है. लेकिन हम पढ़े लिखे इनसान अपने जरूरत से ज्यादा वनों को काट रहे हैं. उन्होंने संथाली भाषा में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुये कही कि हड़िया का प्रयोग आपलोग न करें कुछ स्थानों पर प्रसाद के रूप में ग्रहण करें. इस मौके पर विधायक अनंत ओझा ने राज्यपाल से वानिकी विश्वविद्यालय का मांग किया. जिस पर राज्यपाल ने कहा कि केंद्र को आदिवासी विश्वविद्यालय और सैन्य विद्यालय का प्रस्ताव भेजा.
इस मौके पर राज्यपाल ने आदिवासियों में तीन लोगों के बीच चिरौता काटने वाली तीन मशीन, 70 वन समिति के बीच परिसंपत्ति व टॉर्च का वितरण किया गया. जिससे हाथी को भगाया जा सके. पांच वृक्ष सभी लोगों को लगाने की भी बात कही. दुमका के वन संरक्षक एनके सिंह ने कहा कि जन्म से लेकर मृत्यु तक लकड़ी की जरूरत होती है.
बचपन में खिलौने के रूप में, जवानी में बिछावन व टेबुल में खाने व पड़ने तथा मरने के बाद चीता व कब्र में भी लकड़ी की जरूरत होती है. उन्होंने सभी लोगों से पेड़ लगाने की अपील की. इसके पूर्व विधायक व डीसी, एसपी के द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया.
