राघव चड्ढा विवाद की क्या है असली कहानी, क्यों अरविंद केजरीवाल से बन गई हैं दूरियां?

Raghav Chadha vs AAP : आम आदमी पार्टी में कभी अरविंद केजरीवाल के सबसे चहेते युवा नेता रहे राघव चड्ढा अब उनके लिए आंखों की किरकिरी हो गये हैं. पार्टी ने 2 अप्रैल को उन्हें राज्यसभा में उप नेता के पद से हटा दिया. राघव चड्ढा के खिलाफ जब पार्टी ने यह कार्रवाई की तो पार्टी का अंदरुनी विवाद सामने आ गया है. राज्यभा में उपनेता के पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा ने एक वीडियो मैसेज जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि मैं चुप कराया गया हूं, हारा नहीं हूं. उन्होंने पार्टी से यह भी पूछा है कि जब वे आम आदमी से जुड़े मुद्दों को ही संसद में उठा रहे थे, तो उन्हें किस बात की सजा दी गई है?

Raghav Chadha vs AAP : आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा पर पार्टी ने मोदी सरकार से समझौता करने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला किया है. पार्टी के आधिकारिक एक्स हैंडल से कई ऐसे पोस्ट किए गए हैं, जो चड्ढा को डरपोक और समझौता करने वाला बताते हैं. इन सोशल मीडिया पोस्ट और पार्टी द्वारा उन्हें राज्यसभा के उप नेता पद से हटाये जाने की आखिर वजह क्या है और क्यों राघव चड्ढा अब पार्टी के चहेते नहीं रहे, यह समझने की कोशिश अगर करें, तो पाएंगे कि यह सबकुछ अचानक नहीं हुआ है, इसकी पृष्ठभूमि काफी पहले से तैयार हो रही थी.

राघव चड्डा पर पार्टी लाइन से अलग व्यवहार करने का आरोप क्यों लगा?

राघव चड्डा पर पार्टी ने यह आरोप लगाया है कि वे पार्टी लाइन से अलग जाकर व्यवहार कर रहे थे. जब पार्टी का रुख केंद्र सरकार पर तीव्र हमले का था, तो वे विदेश में छुट्टी मना रहे थे. जब केंद्र सरकार ने अरविंद केजरीवाल को साजिश के तहत जेल भेजा, उस वक्त भी उनका रवैया पार्टी लाइन से अलग रहा. राघव चड्ढा पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से दूर होते दिख रहे हैं और अनुशासन का भी पालन नहीं करते हैं. 

संसद में सॉफ्ट मुद्दे उठाकर अपना पीआर कर रहे

आम आदमी पार्टी का यह भी आरोप है कि राघव चड्ढा ने ना सिर्फ पार्टी लाइन का उल्लंघन किया, बल्कि वे संसद में सॉफ्ट मुद्दे उठाकर अपना पीआर कर रहे थे. उन्हें पार्टी लाइन से कुछ लेना-देना नहीं था. अरविंद केजरीवाल का यह कहना है कि आम जनता के मुद्दों के लिए अगर आपको जेल जाना पड़े, तो जाएं, लेकिन समझौता ना करें. राघव चड्ढा ने पार्टी के इस मूलमंत्र का त्याग कर दिया और वे डर से समझौते करने लगे.

राघव चड्ढा ने हाल में संसद में उठाए कई सॉफ्ट मुद्दे

राघव चड्ढा ने हाल के दिनों में संसद में कई ऐसे मुद्दे उठाए, जो आम आदमी से जुड़े तो थे, लेकिन उनपर विवाद की संभावना काफी कम थी. जैसे एयरपोर्ट पर महंगे समोसे का मुद्दा, पेटरनिटी लीव का मुद्दा, ट्रैफिक की दिक्कतों का मुद्दा,टेलीकाॅम कंपनियों की मनमानी का मुद्दा और गिग वर्कर की परेशानियों का मुद्दा भी शामिल था. अब इन मुद्दों पर अगर गौर करें, तो पाएंगे कि हर मुद्दा आम आदमी से कनेक्ट करता है, इसलिए आम आदमी पार्टी का यह कहना उचित प्रतीत नहीं होता है कि वे आम आदमी के मुद्दों को छोड़ चुके हैं. हां यह बात जरूर हो सकती है कि पार्टी ने अपनी रणनीति में बदलाव किया हो और उसी के तहत राघव चड्ढा के खिलाफ कार्रवाई हुई है.

राघव चड्ढा ने पार्टी को दी चेतावनी

आम आदमी ने जब राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से हटाया तो उन्होंने 3 अप्रैल को अपना वीडियो मैसेज जारी कर पार्टी से पूछा कि कि आखिर उनका दोष क्या है? वे अकसर ऐसे मुद्दे उठाते रहे हैं, जिन्हें उठाने से आम आदमी का फायदा हुआ है, फिर आम आदमी पार्टी का इसमें क्या नुकसान है? उन्होंने कहा कि राज्यसभा सचिवालय को यह कहना कि राघव चड्ढा को बोलने का मौका ना दिया, मुझे चुप कराने की कोशिश है, लेकिन मैं पार्टी से यह कहना चाहता हूं कि मैं हारने वाला नहीं हूं. उन्होंने कहा कि मैं वह दरिया हूं, जब समय आने पर सैलाब भी बन जाता है.

क्या पार्टी से निकाले जा सकते हैं राघव चड्ढा?

आम आदमी पार्टी की नीतियां जिस तरह की रही हैं, वहां सबसे बड़े नेता अरविंद केजरीवाल हैं. पिछले कुछ उदाहरणों को देखें, ते यह पाएंगे कि अगर कोई दूसरा व्यक्ति ज्यादा चर्चित होता है, तो उसे बाहर का रास्ता भी दिखा दिया गया है. ऐसे उदाहरणों में कुमार विश्वास, योगेंद्र यादव जैसे नाम प्रमुख हैं.स्वाति मालीवाल जैसे चेहरे को भी साइड लाइन करने का किस्सा बहुत चर्चित रहा है, जबकि शुरुआत में वे अरविंद केजरीवाल की काफी करीबी रही थीं. ऐसे में यह कहा जा सकता है कि अब बारी राघव चड्ढा की है. राघव चड्ढा एक युवा नेता हैं. क्लीन फेस की वजह से शहर में उनकी अच्छी-खासी लोकप्रियता भी रही है, जो अब उनके खिलाफ काम कर रही है.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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