उधवा. प्रखंड के विभिन्न पंचायतों से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, उधवा के लिए संचालित ममता वाहनों का बकाया भुगतान बीते जून 2023 से अब तक लंबित है. इससे ममता वाहन मालिकों और चालकों को वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. जानकारी के अनुसार, उधवा प्रखंड में कार्यरत ममता वाहन चालकों को करीब 34 महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिससे प्रखंड में मातृ स्वास्थ्य सेवा पर संकट गहराता जा रहा है. राज्य में ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले ममता वाहनों का वेतन लंबित रहना न केवल उनके परिवारों को आर्थिक संकट में डाल रहा है, बल्कि राज्य की मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को भी गंभीर खतरे में डाल रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों में ममता वाहन योजना राज्य सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसके तहत गर्भवती महिलाओं, प्रसवोत्तर माताओं और नवजात शिशुओं को निःशुल्क इमरजेंसी परिवहन सुविधा उपलब्ध करायी जाती है. इसमें ममता वाहनों का संचालन ज्यादातर निजी संचालकों और चालकों द्वारा किया जाता है, जो स्वास्थ्य विभाग के साथ अनुबंध पर काम करते हैं. उधवा प्रखंड के एक ममता वाहन चालक ने बताया कि विगत 34 महीने से हमें वेतन नहीं मिला है, जबकि हर महीने पेट्रोल, रखरखाव, मेंटेनेंस और पारिवारिक खर्चा उठाना पड़ता है. वेतन न मिलने के कारण कई वाहन मालिक और चालक बैंक लोन, बच्चों की पढ़ाई और पारिवारिक खर्च नहीं चुका पा रहे हैं. कई लोग तो वाहन बेचने या दूसरा काम ढूंढने को मजबूर हो गये हैं. वाहन मालिकों और चालकों द्वारा लगातार भुगतान की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. ग्रामीण और स्वास्थ्य कार्यकर्ता यह कहते हैं कि भुगतान में देरी से ममता वाहन योजना की प्रभावशीलता प्रभावित हो रही है, खासकर दूरदराज और सुदूरवर्ती गांवों में, जहां 108 एंबुलेंस के साथ-साथ ममता वाहन ही अंतिम सहारा होते हैं. उधवा प्रखंड के सभी ममता वाहनों का बकाया भुगतान अब तक अनुमंडलीय अस्पताल, राजमहल से किया जाता रहा है. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को अभी तक फंड आवंटन नहीं मिला है. इस मामले में यथासंभव प्रयास किये जाएंगे. -डॉ. गुफरान, प्रभारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, उधवा
उधवा प्रखंड में ममता वाहनों का 34 महीने से बकाया भुगतान, मातृ स्वास्थ्य सेवा पर संकट
ममता वाहन मालिक और चालकों की समस्या

साहिबगंज (फाइल फोटो)