ranchi news : ये हैं रांची के बुजुर्ग... न उम्र की सीमा, न थकावट का बहाना

कुछ बुजुर्गों ने यह साबित कर दिया है कि उम्र सिर्फ एक नंबर है. अपनी योग्यता, अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली की बदौलत ये वरिष्ठ नागरिक न केवल सक्रिय हैं, बल्कि दूसरों के लिए मिसाल भी बन गये हैं.

रांची. कुछ बुजुर्गों ने यह साबित कर दिया है कि उम्र सिर्फ एक नंबर है. अपनी योग्यता, अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली की बदौलत ये वरिष्ठ नागरिक न केवल सक्रिय हैं, बल्कि दूसरों के लिए मिसाल भी बन गये हैं. जहां आज की युवा पीढ़ी सब कुछ तुरंत और आसानी से पाना चाहती है, वहीं ये बुजुर्ग जीवन के इस चरण में भी हर दिन मेहनत कर रहे हैं. स्वस्थ रहने के लिए, समाज को दिशा देने के लिए और खुद को उपयोगी बनाये रखने के लिए. सेकेंड इनिंग में भी ये अपने जीवन की सबसे बेहतर पारी खेल रहे हैं. जो हमें सिखाती है कि जोश, जुनून और जीवन का लक्ष्य उम्र नहीं देखता.

हर दिन दोस्तों के साथ करते हैं योग, अनुभव बांटते हैं

सेहतमंद रहो, सक्रिय रहो और दूसरों को भी प्रेरित करो. इसी मंत्र को जीते हैं कोकर निवासी मदन साहू. करीब 80 वर्ष की उम्र में भी हर सुबह मोरहाबादी मैदान पैदल पहुंचते हैं. कभी अकेले तो कभी मित्रों से लिफ्ट लेकर. वहां योग करते हैं. बुजुर्गों की बैठक में शामिल होते हैं. हंसी-मजाक करते हैं और जीवन के अनुभव बांटते हैं. उनके नेतृत्व में मॉर्निंग ग्रुप में जन्मदिन और सालगिरह जैसे आयोजनों का सिलसिला चलता है. शिक्षा और व्यापार में लंबे समय तक सक्रिय रहे श्री साहू आज भी अपने जीवन को अनुशासित और संतुलित रखते हैं. उनका कहना है : मैं अब भी जिंदा हूं, क्योंकि रोजाना मोरहाबादी मैदान जाता हूं. रोगों से दूर रहना है तो खुद को चलते रहना होगा.

शिक्षकों की भूमिका पर योजनाएं बनाती हैं

सेवानिवृत्त शिक्षिका ललिता प्रताप आज भी समाजसेवा और आत्म विकास के रास्ते पर चल रही हैं. इस्कॉन से जुड़कर भागवत गीता का पाठ करती हैं. मेडिटेशन, योग और सूर्य नमस्कार उनकी दिनचर्या में शामिल हैं. एवरग्रीन रिटायर्ड टीचर्स ग्रुप की सक्रिय सदस्य हैं और समाज में शिक्षकों की भूमिका को लेकर योजनाएं बनाती रहती हैं. 1982 से 2020 तक संत मेरी और कैंब्रियन पब्लिक स्कूल में शिक्षिका रहीं. सेवा-भाव को ही जीवन का सबसे बड़ा पुण्य मानती हैं. उनका कहना है : स्वस्थ रहना जरूरी है, तभी हम औरों के लिए कुछ कर सकते हैं.

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