रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट
Ranchi News: झारखंड से जुड़े सुप्रीम कोर्ट में वर्षों से लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए विशेष लोक अदालत आयोजित की जायेगी. यह विशेष लोक अदालत 21, 22 और 23 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में लगायी जायेगी. इसका उद्देश्य आपसी सहमति के आधार पर पुराने मामलों का समाधान कर न्यायिक प्रक्रिया को तेज करना है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद झारखंड स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (झालसा) ने इस दिशा में तैयारी शुरू कर दी है. बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड से संबंधित 553 लंबित मामलों की सूची झालसा को उपलब्ध करायी है.
सुप्रीम कोर्ट ने जारी की एसओपी
इन मामलों के त्वरित निपटारे को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) भी जारी की गयी है. इसी एसओपी के तहत अब झालसा और जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) कार्रवाई कर रहे हैं. मिली जानकारी के अनुसार सूचीबद्ध 553 मामलों में से 125 मामलों की जिम्मेदारी सीधे झालसा ने अपने हाथ में ली है. ये वे मामले हैं, जिन्हें राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर किया गया था.
प्राइवेट मामलों के लिए डीएलएसए कर रहा पहल
बाकी मामले निजी पक्षकारों से जुड़े हैं. इन मामलों के निपटारे के लिए संबंधित जिलों के जिला विधिक सेवा प्राधिकार को जिम्मेदारी सौंपी गयी है. डीएलएसए के माध्यम से पक्षकारों तक सहमति पत्र यानी कंसेंट फॉर्मेट पहुंचाया जा रहा है. नोटिस, डाक, पारा लीगल वॉलेंटियर और डीएलएसए के कर्मचारियों की मदद से पक्षकारों से संपर्क किया जा रहा है. जिन मामलों में दोनों पक्ष समझौते के लिए तैयार होंगे, उनमें आगे की प्रक्रिया शुरू की जायेगी.
जून के पहले सप्ताह से शुरू होगी मध्यस्थता
झालसा सूत्रों के अनुसार जिन मामलों में पक्षकारों की सहमति मिल रही है, उनमें जून के पहले सप्ताह से मध्यस्थता प्रक्रिया शुरू कर दी जायेगी. मध्यस्थता के माध्यम से मामलों को आपसी समझौते से सुलझाने का प्रयास किया जायेगा. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से वर्षों से लंबित कई मामलों का समाधान संभव हो सकेगा. इससे पक्षकारों को भी राहत मिलेगी और सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों का बोझ कम होगा.
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लोगों को मिलेगा त्वरित न्याय
विशेष लोक अदालत का उद्देश्य लोगों को त्वरित और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है. झालसा की ओर से कहा गया है कि अधिक से अधिक मामलों को सहमति के आधार पर सुलझाने का प्रयास किया जायेगा, ताकि पक्षकारों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिल सके. झारखंड से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए सुप्रीम कोर्ट स्तर पर हो रही यह पहल राज्य के न्यायिक इतिहास में महत्वपूर्ण मानी जा रही है. इससे न सिर्फ पुराने विवाद खत्म होंगे, बल्कि न्याय व्यवस्था में लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा.
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