रांची से मनोज सिंह की रिपोर्ट
Sahibganj Illegal Mining: झारखंड के साहिबगंज में कथित अवैध खनन के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की पूर्वी क्षेत्रीय पीठ ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जेएसपीसीबी) की कार्यप्रणाली पर गंभीर नाराजगी जताई है. सुनवाई के दौरान अधिकरण ने इस बात पर सवाल उठाया कि नोटिस जारी होने के करीब दो महीने बाद जाकर निरीक्षण क्यों किया गया. एनजीटी ने स्पष्ट कहा कि समय पर जांच नहीं होने और बाद में जलभराव का हवाला देने से मामले की वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ सकती.
प्रदूषण बोर्ड के जवाब पर जताई असंतुष्टि
सुनवाई के दौरान झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपने प्रतिवाद में बताया कि 17 जुलाई 2026 को संयुक्त समिति द्वारा किए गए निरीक्षण में अवैध खनन तथा जेसीबी मशीनों और ट्रैक्टरों के उपयोग के आरोप सही नहीं पाए गए. हालांकि, एनजीटी इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ. अधिकरण ने कहा कि मूल आवेदन में लगाए गए आरोपों का जवाब केवल निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर नहीं दिया जा सकता. अदालत ने पूछा कि जब 18 मई 2026 को नोटिस जारी किया गया था, तब मानसून शुरू होने से पहले मौके का निरीक्षण क्यों नहीं किया गया.
देरी से निरीक्षण पर उठाए सवाल
एनजीटी ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि निरीक्षण में जानबूझकर देरी हुई और बाद में क्षेत्र में जलभराव की स्थिति का हवाला देकर यह दर्शाने की कोशिश की गई कि वहां किसी प्रकार का अवैध खनन नहीं हुआ. अधिकरण ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि निरीक्षण के समय पानी भरा हुआ था, इसलिए अवैध खनन के कोई प्रमाण नहीं मिले. अदालत ने कहा कि यदि समय पर निरीक्षण किया जाता, तो वास्तविक स्थिति का बेहतर आकलन संभव था. इसलिए इस तरह की रिपोर्ट को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता.
अतिरिक्त जवाब दाखिल करने का निर्देश
एनजीटी ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह मूल आवेदन में लगाए गए सभी आरोपों पर विस्तृत और तथ्यात्मक अतिरिक्त जवाब दाखिल करे. बोर्ड को यह स्पष्ट करना होगा कि शिकायत दर्ज होने के समय क्षेत्र की वास्तविक स्थिति क्या थी और अवैध खनन के आरोपों की जांच किस प्रकार की गई. अधिकरण ने यह भी कहा कि केवल वर्तमान स्थिति का उल्लेख पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस समय की परिस्थितियों का भी स्पष्ट विवरण देना होगा, जब शिकायत की गई थी.
साहिबगंज डीसी से भी मांगी विस्तृत रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए एनजीटी ने साहिबगंज के उपायुक्त को भी चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. उपायुक्त को जिले में खनन गतिविधियों से जुड़े सभी अभिलेख, अवैध खनन रोकने के लिए जिला टास्क फोर्स द्वारा उठाए गए कदम तथा की गई कार्रवाई का पूरा विवरण प्रस्तुत करना होगा. अधिकरण ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय के भीतर जवाब दाखिल नहीं किया गया तो साहिबगंज के उपायुक्त को व्यक्तिगत रूप से अथवा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एनजीटी के समक्ष उपस्थित होना पड़ेगा.
इसे भी पढ़ें: लोहरदगा में 1 अगस्त को बंद रहेंगी ज्वेलरी शॉप्स, हत्या और लूट की घटनाओं पर गुस्से में दुकानदार
3 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
एनजीटी ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 सितंबर 2026 की तिथि निर्धारित की है. तब तक झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और साहिबगंज जिला प्रशासन को अपने-अपने विस्तृत जवाब दाखिल करने होंगे. साहिबगंज में अवैध खनन को लेकर यह मामला लंबे समय से चर्चा में है. अब एनजीटी की सख्त टिप्पणी के बाद संबंधित विभागों और जिला प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं. अधिकरण ने स्पष्ट संकेत दिया है कि पर्यावरण से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या विलंब को गंभीरता से लिया जाएगा और सभी संबंधित एजेंसियों को तथ्यों के आधार पर जवाबदेह होना होगा.
इसे भी पढ़ें: चक्रधरपुर में 44.64 लाख की चोरी का खुलासा, पुलिस ने चार अंतरराज्यीय चोरों को दबोचा
