विशेष संवाददाता, रांची
Jharkhand e-Challan Relief : झारखंड में सड़क और पुल निर्माण योजनाओं में आ रही बाधा जल्द दूर होने की उम्मीद है. सड़कों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी-मोरम की ढुलाई के लिए ई-परिवहन चालान की अनिवार्यता से छह महीने की राहत देने की तैयारी की जा रही है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर खान विभाग ने इससे संबंधित प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जायेगा. राहत मिलने के बाद राज्य में अटकी करीब पांच हजार करोड़ रुपये की सड़क, पुल और पुलिया परियोजनाओं को गति मिल सकेगी. इसमें रांची की 1080 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के साथ ग्रामीण और पथ निर्माण विभाग की योजनाएं भी शामिल हैं. ज्ञात हो कि मई माह से ही यह परियोजना ई-चालान के कारण अटकी हुई थी.
ग्रामीण कार्य विभाग ने खान सचिव को लिखा था पत्र
ग्रामीण सड़कों के काम में मिट्टी और मोरम का रॉयल्टी चालान ठेकेदारों को नहीं मिल रहा है. इस कारण ठेकेदार अपने बिल के साथ चालान जमा नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उन्हें काम के एवज में भुगतान नहीं हो रहा है. मिट्टी व मोरम का चालान नहीं मिलने के कारण वे नया काम शुरू नहीं कर पा रहे हैं. ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव मनोज कुमार ने इस बाबत खान सचिव को पत्र लिखा था. उन्होंने लिखा कि ऐसी सूचना प्राप्त हो रही है कि मिट्टी व मोरम से संबंधित लाइसेंस निर्गत नहीं किया जा रहा है. ऐसे में ठेकेदारों द्वारा रॉयल्टी चालान कैसे प्रस्तुत किया जा सकता है. उन्होंने खान सचिव से आग्रह किया है कि रॉयल्टी जमा करने के लिए पूर्व में लागू व्यवस्था को ही बनाये रखें. इसके बाद खान विभाग ने नया प्रस्ताव कैबिनेट के लिए तैयार किया.
रांची में ये योजनाएं हैं फंसी हैं
| योजना | लागत (करोड़ रुपये) |
| पंडरा से कांके रोड तक फोरलेन | 253 |
| बड़गाईं से लेम होते हुए बोड़ेया तक फोरलेन | 111 |
| रिंग रोड चंदाघासी से एयरपोट तक फोरलेन | 280 |
| डीएवी पुंदाग से डीएवी हेहल तक की सड़क | 102 |
| खेलगांव से दुर्गा सोरेन चौक तक फोरलेन | 158 |
| कांके रोड से एदलहातू होते हुए बोड़ेया रोड | 20 |
| ओल्ड अरगोड़ा चौक का नयासराय | 141 |
| सिंह मोड़ से लटमा-हेथू रोड | 15 |
नोट: लागत राशि करोड़ रुपये में
दो बड़ी परोयोजनया होने वाली है शुरू
- चिरौंदी से बरियातू होते हुए फायरिंग रेज रोड
- धुर्वा के विवेकानंद स्कूल मोड़ से हाईकोर्ट होते हुए नयासराय तक
क्या हो रही है परेशानी
जिन वाहनों से मिट्टी की ढुलाई होगी, उनके पास चालान होना अनिवार्य कर दिया गया है. चूंकि मिट्टी-मोरम के लिए लीज देने का प्रावधान नहीं है, ऐसे में इसका चालान निर्गत नहीं किया जा रहा है. गौरतलब है कि सड़कों के निर्माण और चौड़ीकरण के कार्य में सबसे पहले अर्थ वर्क होता है. यानी इसमें मिट्टी, मोरम आदि का इस्तेमाल होता है. अभी ठेकेदार मिट्टी-मोरम का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे है, जिससे ये कार्य प्रभावित हो गये है.
पहले क्या था नियम?
पहले मिट्टी-मोरम उठाव के लिए ठेकेदार किसी रैयती या गैर मजरूआ जमीन को चिह्नित करते थे. मिट्टी-मोरम का उठाव कर रॉयल्टी के रूप में वास्तविक रेट का दोगुना जमा किया जाता था. ठेकेदारों के बिल से विभाग यह राशि काटकर जमा करा देता था. ठेकेदार कहीं से भी उक्त सामग्री का उठाव आसानी से कर रहे थे.
क्या है प्रावधान?
खान एवं भूतत्व विभाग की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि झारखंड लघु खनिज समादान नियमावली-2004 के तहत सामान्य मिट्टी के खनन और परमिट निर्गत करने की प्रक्रिया वर्तमान में भी प्रभावी है. इसके तहत मिट्टी ढुलाई के लिए ई-परिवहन चालान अनिवार्य रूप से लेना होगा. भारत सरकार ने मिट्टी को गौण खनिज घोषित किया है. इसके लिए आवश्यक वैधानिक अनुमति प्राप्त कर ऑनलाइन प्रक्रिया से परमिट लिया जा सकेगा.
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