MMDR कानून के विरोध में झामुमो का प्रदेशव्यापी हल्ला बोल, 260 प्रखंडों में दिया धरना, कहा - जल-जंगल-जमीन पर कोई समझौता नहीं; केंद्र ने कहा- राज्यों का 90% राजस्व यथावत रहेगा

झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 के विरोध में राज्यभर के 260 प्रखंडों में धरना-प्रदर्शन किया. पार्टी जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा से जुड़े राज्य के अधिकारों की रक्षा की मांग कर रही है.

रांची: खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने शनिवार को राज्यभर के 260 प्रखंडों में धरना-प्रदर्शन किया. इसमें मंत्री, विधायक और केंद्रीय समिति के सदस्य शामिल हुए. प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गयी. इसके बाद राष्ट्रपति के नाम संबंधित प्रखंडों के बीडीओ और सीओ को ज्ञापन सौंपा गया.

राज्य के अधिकारों की रक्षा की मांग

झामुमो के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि एमएमडीआर संशोधन के खिलाफ पार्टी का आंदोलन प्रखंड मुख्यालयों से गांवों तक पहुंच रहा है. उन्होंने कहा कि पार्टी जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा से जुड़े राज्य के अधिकारों की रक्षा की मांग कर रही है. पांडेय ने कहा कि पार्टी के अनुसार एमएमडीआर संशोधन से राज्यों के संवैधानिक अधिकार और वित्तीय स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है. उन्होंने खनिज से जुड़े पुराने बकाये का भी मुद्दा उठाया और कहा कि झारखंड के करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये के बकाये का भुगतान किया जाना चाहिए. झामुमो इस राशि में भूमि मुआवजा, कॉमन कॉज से जुड़े बकाये और वॉश्ड कोल रॉयल्टी समेत अन्य मदों को शामिल करता रहा है.

राज्यों को मिलने वाला राजस्व प्रभावित नहीं

वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि एमएमडीआर संशोधन से राज्यों के खनिज और भूमि अधिकार समाप्त नहीं होते तथा खनन क्षेत्र से होने वाले कुल कर और वैधानिक भुगतान का करीब 90 प्रतिशत राज्यों को मिलता रहेगा. केंद्र के अनुसार रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, जिला खनिज फाउंडेशन और जीएसटी से राज्यों को मिलने वाला राजस्व प्रभावित नहीं होगा.

ये भी पढ़ें: रांची: अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ की बैठक, दिसंबर में 10 हजार कर्मचारियों के साथ प्रोजेक्ट भवन के समक्ष प्रदर्शन का ऐलान

अगले चरण में जिला मुख्यालयों पर होगा प्रदर्शन

विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि प्रखंड मुख्यालयों पर प्रदर्शन आंदोलन का पहला चरण है. इसके बाद जिला मुख्यालयों पर विरोध-प्रदर्शन किया जायेगा. इसके बाद राज्यस्तरीय आंदोलन की तैयारी की जायेगी. उन्होंने कहा कि झामुमो इस मुद्दे को राजनीतिक के साथ-साथ संवैधानिक और कानूनी मंचों पर भी उठायेगा.

ये भी पढ़ें: MMDR को लेकर झारखंड में छिड़ा सियासी संग्राम: भाजपा 19 से चलाएगी जन-जागरूकता अभियान, कहा - 90% राजस्व अब भी राज्यों का, JMM फैला रहा भ्रम

मंत्री और विधायक भी धरने में हुए शामिल

मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने गोमिया प्रखंड कार्यालय परिसर में आयोजित धरने में हिस्सा लिया. विधायक उदय शंकर सिंह उर्फ चुन्ना सिंह ने सारठ प्रखंड मुख्यालय में धरना दिया. पोटका में विधायक संजीव सरदार और बुंडू में विधायक अमित महतो समेत अन्य मंत्री और विधायकों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लिया.

इन मांगों को लेकर सौंपा गया ज्ञापन

झामुमो ने ज्ञापन के माध्यम से खनिज संपदा और खनन अधिकारों से जुड़े राज्यों के संवैधानिक एवं संघीय अधिकारों की रक्षा की मांग की. पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के 25 जुलाई 2024 के फैसले को लागू कराने, करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये के लंबित खनन दावों के निपटारे और आदिवासी-मूलवासी, विस्थापित तथा खनन प्रभावित लोगों के अधिकार सुरक्षित रखने की मांग भी उठायी.

ये भी पढ़ें: MMDR संशोधन पर सरकार 'आर-पार' के मूड में: JMM की चेतावनी- 'झारखंड से बाहर नहीं जाने देंगे खनिज का एक ढेला'

रांची के सभी प्रखंडों में भी हुआ प्रदर्शन

झामुमो ने रांची जिले के सभी प्रखंडों में भी धरना दिया. जिला समिति की ओर से अनगड़ा, बेड़ो, बुढ़मू, चान्हो, इटकी, कांके, खलारी, लापुंग, मांडर, नामकुम, ओरमांझी, रातू, नगड़ी, बुंडू, राहे, सोनाहातू और तमाड़ में कार्यक्रम आयोजित किये गये. धरना में जिला समिति के संयोजक मुश्ताक आलम, हेमलाल मेहता, अश्विनी शर्मा, साहिल यादव, गोपाल पांडेय, राहुल शर्मा समेत अन्य कार्यकर्ता शामिल हुए.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Sunil Choudhary

सुनील चौधरी प्रभात खबर में विशेष संवाददाता हैं. पिछले 26 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय सुनील चौधरी करीब 25 वर्षों से प्रभात खबर से जुड़े हैं. इससे पहले वे ईटीवी में भी काम कर चुके हैं. खोजी पत्रकारिता, राजनीतिक खबरों, तथ्यपरक विश्लेषण और जमीनी सरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से सामने लाना उनकी पत्रकारिता की पहचान है.

नेशनल गेम के टेंडर में गड़बड़ी, ग्रामीण विद्युतीकरण टेंडर घोटाला, बालू घोटाला और करीब 4,000 करोड़ रुपये के एमएसडी घोटाले जैसे महत्वपूर्ण मामलों को उन्होंने प्रमुखता से उठाया, जिनका व्यापक सामाजिक और प्रशासनिक प्रभाव रहा. मुख्यमंत्री बीट के साथ ऊर्जा, खनन, औद्योगिक विकास, सरकारी योजनाओं, राजनीति और सार्वजनिक नीति से जुड़े विषयों पर वे लगातार खबरें लिखते रहे हैं.

दस्तावेजों और तथ्यों की गहन पड़ताल के साथ जटिल विषयों को सरल और स्पष्ट तरीके से पाठकों तक पहुंचाना उनकी रिपोर्टिंग की खासियत है. राजनीति, एआइ और टेक्नोलॉजी, पावर सेक्टर, उद्योग-खनन और हार्ड न्यूज उनके पसंदीदा विषय हैं. बदलती तकनीक और अर्थव्यवस्था के बीच नीतिगत फैसलों और उनके जमीनी प्रभावों को समझना और सामने लाना उनकी पत्रकारिता का अहम हिस्सा रहा है.

सुनील चौधरी को बीबीसी, पैनोस इंटरनेशनल और झारखंड सरकार की फेलोशिप मिल चुकी है. विभिन्न महत्वपूर्ण और खोजी खबरों के लिए उन्हें कई संस्थानों द्वारा कई बार सम्मानित और पुरस्कृत किया गया है.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >