रांची: नेताजी सुभाष चंद्र बोस का रांची से गहरा लगाव रहा है. बताया जाता है कि वह लालपुर स्थित फणींद्रनाथ आयकत के बंगले में तीन दिनों तक ठहरे थे. आयकत परिवार ने आज भी नेताजी से जुड़ी कई यादों को संभालकर रखा है. इनमें कुर्सी और पलंग समेत कई सामान शामिल हैं. नेताजी के रांची प्रवास से जुड़ी एक फिएट कार भी आज परिवार के पास सुरक्षित है. श्रद्धानंद रोड निवासी स्वर्गीय डॉ फणींद्रनाथ चटर्जी रांची के प्रख्यात चिकित्सक थे. बताया जाता है कि उन्होंने अपने मित्र डॉ यदुगोपाल मुखर्जी के साथ नेताजी को रामगढ़ जाने के लिए अपनी फिएट कार उपलब्ध करायी थी. इस यात्रा में डॉ फणींद्रनाथ चटर्जी, डॉ यदुगोपाल मुखर्जी और फणींद्रनाथ आयकत ने नेताजी की मदद की थी. यह फिएट कार वर्ष 1932 में खरीदी गयी थी. आज भी डॉ फणींद्रनाथ चटर्जी के पोते अरुप चटर्जी इसकी देखरेख करते हैं.
आज निकलेगी आक्रोश रैली
रविवार को इसी फिएट कार को शामिल कर आक्रोश रैली निकाली जायेगी. आयोजकों के अनुसार, रैली के माध्यम से नेताजी के प्रति लोगों के सम्मान और उनके देश के लिए किये गये संघर्ष को याद किया जायेगा. आयोजकों का कहना है कि नेताजी से जुड़ी यादों और उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता.
दिसंबर 1939 की वह मुलाकात
अरुप चटर्जी बताते हैं कि दिसंबर 1939 की सर्द रात की वह घटना आज भी परिवार की यादों में ताजा है. उनके दादा डॉ फणींद्रनाथ चटर्जी को उनके मित्र डॉ यदुगोपाल मुखर्जी ने रात करीब साढ़े आठ बजे अपने घर बुलाया था. परिवार के अनुसार, 18 मार्च 1940 को नेताजी को इसी फिएट कार से चक्रधरपुर से रांची लाया गया था. इसके बाद वह लालपुर स्थित आयकत बंगले में तीन दिनों तक ठहरे. 20 मार्च को इसी फिएट कार से वह रामगढ़ में आयोजित 53वें कांग्रेस अधिवेशन में शामिल होने पहुंचे थे. बताया जाता है कि रांची प्रवास के दौरान तीन दिनों तक इसी कार से उन्होंने शहर के विभिन्न हिस्सों का भ्रमण भी किया था.
