JSSC Teacher Case, रांची (राणा प्रताप): झारखंड हाईकोर्ट ने सहायक आचार्य प्रतियोगिता परीक्षा-2023 के नॉर्मलाइजेशन को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सख्त रुख अपनाया है. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि आयोग को नॉर्मलाइजेशन की अपनी पूरी प्रक्रिया और वैज्ञानिक आधार का डिटेल्स प्रस्तुत करना होगा.
ज्यादा अंक पाकर भी फेल हुए अभ्यर्थी
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया में भारी विसंगतियां हैं. आरोप लगाया गया कि कई ऐसे अभ्यर्थी हैं जिनके अंक अधिक होने के बावजूद उन्हें असफल घोषित कर दिया गया, जबकि कम अंक वाले उम्मीदवार सफल हो गए. इस विसंगति ने पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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पारदर्शिता और वैज्ञानिक आधार की मांग
अभ्यर्थियों का तर्क है कि जेएसएससी द्वारा अपनाई गई नॉर्मलाइजेशन की पद्धति पारदर्शी नहीं है. इससे योग्य और प्रतिभावान उम्मीदवारों के साथ अन्याय हो रहा है. उन्होंने अदालत से गुहार लगाई है कि आयोग को एक स्पष्ट, पारदर्शी और वैज्ञानिक आधार पर नॉर्मलाइजेशन लागू करने का निर्देश दिया जाए, ताकि किसी भी अभ्यर्थी के साथ भेदभाव न हो.
13 मई को होगी निर्णायक सुनवाई
अदालत ने फिलहाल सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जेएसएससी को अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया है. मामले की अगली सुनवाई 13 मई 2026 को निर्धारित की गई है. इस सुनवाई में आयोग के जवाब के बाद ही तय होगा कि परीक्षा का परिणाम बरकरार रहेगा या इसमें कोई बड़ा बदलाव होगा. हजारों शिक्षकों के पदों से जुड़ी इस भर्ती पर अब पूरे राज्य के अभ्यर्थियों की निगाहें टिकी हुई हैं.
