रांची: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने 14वीं जेपीएससी परीक्षा में कथित गड़बड़ी और भ्रष्टाचार को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है. भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में अफसर बनने के लिए 40 लाख रुपये का रेटचार्ट चल रहा है. इसमें पीटी के लिए पांच लाख, मुख्य परीक्षा के लिए 25 लाख और साक्षात्कार के लिए 10 लाख रुपये वसूले जा रहे हैं.
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को घेरते हुए कहा कि अगर वे पूरी तरह पाक-साफ हैं, तो उन्हें इस मामले की सीबीआइ जांच कराने से आपत्ति क्यों है? उन्होंने वर्तमान सीआइडी जांच को आइवाश करार देते हुए कहा कि यह जांच सच सामने लाने के लिए नहीं, बल्कि सबूतों को मिटाने और पर्दे के पीछे छिपे माफियाओं को बचाने के लिए करायी जा रही है.
उन्होंने कहा कि शराब घोटाले और जेएसएससी सीजीएल जैसे मामलों में भी सीआइडी का ट्रैक रिकॉर्ड खराब रहा है और आज तक इनमें चार्जशीट तक दाखिल नहीं हो सकी है. नेता प्रतिपक्ष ने जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते पर निशाना साधते हुए कहा कि कर्नाटक के एक छात्र ने जनवरी में ही उन्हें ओएमआर शीट में गड़बड़ी की जानकारी दी थी, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की.
केवल इस्तीफा देने से वे मुक्त नहीं हो सकते, सरकार को उनके खिलाफ एफआइआर दर्ज कर तुरंत गिरफ्तार करना चाहिए. श्री मरांडी ने सीआइडी के अपर महानिदेशक मनोज कौशिक की कार्यशैली पर भी सवाल उठाये और उन्हें नसीहत दी कि वे मुख्यमंत्री के पिछले दुलरुआ अफसरों का हश्र देख लें. उन्होंने आरोप लगाया कि जानबूझकर एफआइआर को कमजोर किया गया है और इसे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज नहीं किया गया.
उन्होंने चिंता व्यक्त की कि अगर बुनियाद ही भ्रष्ट होगी, तो झारखंड का भविष्य कभी नहीं सुधरेगा. राज्य की सभी भर्ती परीक्षाएं विवादों में हैं और नौकरियां खुलेआम बेची जा रही हैं. उन्होंने युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए मामले को तुरंत सीबीआई को सौंपने की मांग की. मौके पर प्रदेश मीडिया प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह और प्रवक्ता राफिया नाज भी मौजूद थीं.
