रांची. गुजरात में चुनाव आयोग में पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त छह राजनीतिक दलों को वित्तीय वर्ष 2023-24 में मिले करीब 1700 करोड रुपये के चंदे को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने केंद्र सरकार और गुजरात सरकार पर सवाल उठाये हैं. झामुमो के केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता विनोद कुमार पांडेय ने पार्टी के कैंप कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान इस मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की.
विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि जिन राजनीतिक दलों की चुनावी गतिविधियां सीमित हैं और जो बहुत कम उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारते हैं, उन्हें इतनी बडी रकम का चंदा कैसे मिला, यह जांच का विषय है. उन्होंने सोशल मीडिया पर चर्चा में आये आंकडों का हवाला देते हुए कहा कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में गुजरात की छह गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों को करीब 1700 करोड रुपये से अधिक का चंदा मिलने की जानकारी सामने आयी है.
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इन छह दलों को कुल करीब 1700.78 करोड रुपये मिले. इनमें आम जनमत पार्टी को करीब 620 करोड रुपये मिले थे. इन छह दलों ने 2024 के लोकसभा चुनाव में कुल 15 उम्मीदवार उतारे थे. तुलना में उस समय के पांच राष्ट्रीय दलों कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, सीपीआइ (एम) और नेशनल पीपुल्स पार्टी को मिलाकर करीब 1480 करोड रुपये मिले थे. ये आंकडे चुनाव आयोग के आंकडों और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के आधार पर सामने आये हैं.
झामुमो ने पूछे चार सवाल
झामुमो प्रवक्ता ने कहा कि यह मामला केवल राजनीतिक फंडिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनावी व्यवस्था की पारदर्शिता से भी जुडा है. उन्होंने सवाल उठाया कि इन दलों को इतनी बडी रकम देने वाले लोग या संस्थाएं कौन हैं और इस फंड का इस्तेमाल किस तरह किया गया.
उन्होंने पूछा कि गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को 1700 करोड रुपये से अधिक की यह रकम किसने दी. चुनावी गतिविधियां सीमित होने के बावजूद इतनी बडी रकम जुटाने की जरूरत क्यों पडी. चुनाव आयोग और आयकर विभाग ने फंडिंग के इस पैटर्न पर अब तक क्या कार्रवाई की और केंद्रीय जांच एजेंसियां इस मामले की जांच कब शुरू करेंगी.
दानदाताओं और फंड के स्रोत की जांच की मांग
झामुमो ने मांग की है कि भारी चंदा पाने वाले इन राजनीतिक दलों के दानदाताओं, फंड के स्रोत और खर्च का विस्तृत ऑडिट कराया जाये. पार्टी का कहना है कि राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे की पारदर्शिता सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था में जरूरी है.
गौरतलब है कि गुजरात की इन छह पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों की फंडिंग को लेकर हाल में प्रकाशित रिपोर्टों में भी सवाल उठाये गये हैं. रिपोर्ट के अनुसार, इन दलों ने 2024 के लोकसभा चुनाव में कुल 15 उम्मीदवार उतारे थे, जबकि पांच राष्ट्रीय दलों ने 893 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे.
