रांची: मध्य प्रदेश के बालाघाट में बैगा (पीवीटीजी) और गोंड आदिवासी समुदाय के करीब 30 बच्चों की मौत को लेकर झामुमो ने भाजपा पर हमला बोला है. झामुमो प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में विधायक लुईस मरांडी व सुदीप गुड़िया ने आरोप लगाया कि आदिवासी बच्चों की मौत के मामले में मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने समय रहते गंभीरता नहीं दिखायी. साथ ही मौत के आंकड़ों को भी छिपाने की कोशिश की. लुईस मरांडी ने कहा कि जून से ही बच्चों की मौत का सिलसिला शुरू हो गया था. यदि सरकार ने शुरुआती दौर में बीमारी को गंभीरता से लिया होता, तो इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की मौत नहीं होती. नेताओं ने सवाल उठाया कि 30 आदिवासी बच्चों की मौत की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा? आदिवासी समाज अपने जल, जंगल और जमीन के अधिकार की बात करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है.
हाइकोर्ट के हस्तक्षेप को बनाया मुद्दा
तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया ने कहा कि जब बच्चों की मौत का आंकड़ा 27 से 30 तक पहुंच गया, तब जाकर हाइकोर्ट को मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा. उन्होंने इसे मध्य प्रदेश सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी की विफलता बताया. केंद्र में स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला को इस मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए. उन्होंने तीनों से इस्तीफे की मांग की. मृत बच्चों के परिवारों को 25-25 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग का भी समर्थन किया.
एमएमडीआर पर भी केंद्र को घेरा
झामुमो ने आरोप लगाया कि खनिज संपदा वाले आदिवासी क्षेत्रों में नीतिगत बदलावों से स्थानीय लोगों पर विस्थापन और शोषण का दबाव बढ़ सकता है.
कुपोषण पर सवाल आया तो झामुमो ने हेमंत सरकार का बचाव किया
प्रेस कांफ्रेंस में जब झारखंड में कुपोषण के आंकड़ों और आदिवासी बच्चों की स्थिति को लेकर सवाल पूछा गया, तो विधायक सुदीप गुड़िया ने माना कि राज्य में कुपोषण की समस्या है. हालांकि उन्होंने दावा किया कि दूसरे राज्यों की तुलना में झारखंड सरकार आदिवासी हितों को लेकर ज्यादा गंभीर है. झारखंड में बीमारी और कुपोषण जैसी समस्याओं पर हेमंत सोरेन सरकार समय रहते कार्रवाई करती है.
