रांची: एमएमडीआर संशोधन अधिनियम-2026 को लेकर केंद्र सरकार के दावों पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दुबे ने पलटवार किया है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब खनिज संपदा झारखंड की है, तो इससे जुड़े फैसले दिल्ली से क्यों लिये जा रहे हैं. आलोक कुमार दुबे ने कहा कि खनिज उत्पादन बढ़ाने के नाम पर राज्यों के संवैधानिक और वित्तीय अधिकारों को सीमित करना संघीय ढांचे के लिए चिंता का विषय है. उन्होंने आरोप लगाया कि संशोधन के जरिए राज्यों को टैक्स, सेस या अन्य लेवी लगाने से रोकने का प्रावधान किया गया है. कांग्रेस नेता ने इसे राज्यों के अधिकारों को कमजोर करने वाला कदम बताया.
स्थानीय विकास का महत्वपूर्ण आधार
उन्होंने कहा कि झारखंड जैसे खनिज बहुल राज्य के लिए खनिज संसाधन अर्थव्यवस्था और स्थानीय विकास का महत्वपूर्ण आधार हैं. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि राज्यों की कराधान शक्ति को सीमित करने के किसी भी प्रयास पर संवैधानिक स्तर पर विमर्श जरूरी है. कांग्रेस ने मांग की है कि केंद्र सरकार राज्यों के साथ व्यापक विचार-विमर्श करे और यह सुनिश्चित करे कि खनिज संपदा वाले राज्यों के वित्तीय अधिकार सुरक्षित रहें.
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केंद्र सरकार ने बताया राज्यों के हित सुरक्षित
केंद्र सरकार ने एमएमडीआर संशोधन अधिनियम-2026 को लेकर कहा है कि इससे राज्यों के भूमि और खनिज संबंधी अधिकार प्रभावित नहीं होंगे. केंद्र के अनुसार खनन क्षेत्र से मिलने वाले कुल कर और वैधानिक भुगतानों में करीब 90 प्रतिशत राज्यों को मिलता है और यह व्यवस्था संशोधन के बाद भी जारी रहेगी. सरकार ने यह भी कहा है कि राज्यों को रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) और जीएसटी में उनका हिस्सा मिलता रहेगा. एमएमडीआर संशोधन को लेकर झारखंड में कांग्रेस और झामुमो दोनों की ओर से विरोध दर्ज कराया गया है.
