डोरंडा गर्ल्स मिडिल स्कूल की दो शिक्षिकाओं को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने दिया नियुक्ति का आदेश

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने डोरंडा गर्ल्स मिडिल स्कूल की दो शिक्षिकाओं सुचिता शर्मा और अर्चना कुमारी को बड़ी राहत देते हुए उनकी नियुक्ति को मंजूरी देने का आदेश दिया है. कोर्ट ने स्कूल को अल्पसंख्यक संस्थान मानते हुए डीएसई रांची को 30 दिनों में स्वीकृति और वेतन जारी करने का निर्देश दिया. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने डोरंडा गर्ल्स मिडिल स्कूल की दो शिक्षिकाओं सुचिता शर्मा और अर्चना कुमारी को बड़ी राहत देते हुए उनकी नियुक्ति को मंजूरी देने का आदेश दिया है. न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत ने राज्य सरकार और जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई), रांची द्वारा नियुक्ति स्वीकृति से इनकार करने के आदेश को रद्द कर दिया. अदालत ने कहा कि दोनों शिक्षिकाओं की नियुक्ति नियमों के अनुरूप हुई थी और उन्हें विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति दी जानी चाहिए.

2023 में हुई थी नियुक्ति, लेकिन नहीं मिली स्वीकृति

डोरंडा गर्ल्स मिडिल स्कूल, जो एक भाषाई अल्पसंख्यक विद्यालय है, ने 29 अप्रैल 2023 को सहायक शिक्षकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया था. चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सुचिता शर्मा और अर्चना कुमारी को 12 मई 2023 को नियुक्ति पत्र दिया गया और उन्होंने 17 मई 2023 को योगदान भी दे दिया. इसके बावजूद जिला शिक्षा अधीक्षक, रांची ने 30 जुलाई 2024 को दोनों की नियुक्ति को मंजूरी देने से इनकार कर दिया. इसके खिलाफ दोनों शिक्षिकाओं ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

डीएसई ने नियुक्ति खारिज करने के लिए दिए थे दो तर्क

जिला शिक्षा अधीक्षक ने नियुक्ति स्वीकृति से इनकार करते हुए दो प्रमुख कारण बताए थे. पहला, डोरंडा गर्ल्स मिडिल स्कूल को अल्पसंख्यक विद्यालय नहीं मानते हुए आरक्षण नीति का पालन नहीं करने का आरोप लगाया गया. दूसरा, दोनों उम्मीदवारों को निर्धारित अधिकतम आयु सीमा से अधिक बताया गया. राज्य सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि अधिकतम आयु सीमा 38 वर्ष थी, जबकि दोनों महिलाओं की आयु 41 वर्ष से अधिक थी.

स्कूल एक मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक संस्थान

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वर्ष 2009 में आरटीआई के तहत जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा दी गई जानकारी और पूर्व के न्यायिक आदेशों का हवाला दिया गया. इनमें डोरंडा गर्ल्स मिडिल स्कूल को भाषाई अल्पसंख्यक विद्यालय बताया गया था. अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद माना कि यह विद्यालय एक मान्यता प्राप्त भाषाई अल्पसंख्यक स्कूल है. ऐसे में राज्य सरकार द्वारा यह कहना कि विद्यालय अल्पसंख्यक नहीं है, स्वीकार नहीं किया जा सकता.

आयु सीमा पर भी अदालत ने तर्क को खारिज किया

हाईकोर्ट ने झारखंड प्राथमिक विद्यालय सहायक शिक्षक संवर्ग नियमावली, 2022 का उल्लेख करते हुए कहा कि लंबे समय तक नियुक्ति प्रक्रिया नहीं होने की स्थिति में अभ्यर्थियों को आयु सीमा में छूट देने का प्रावधान है. अदालत ने पाया कि पिछली नियुक्ति प्रक्रिया वर्ष 2012 में हुई थी और नई नियुक्ति 2023 में हुई. इस बीच के अंतराल को देखते हुए दोनों याचिकाकर्ताओं को आयु में छूट का लाभ मिलना चाहिए था. इसके अलावा वर्ष 2023 में जारी सरकारी शिक्षक नियुक्ति विज्ञापन में महिला अभ्यर्थियों के लिए अधिकतम आयु सीमा 43 वर्ष निर्धारित की गई थी. दोनों शिक्षिकाएं इस सीमा के भीतर थीं.

चयन के बाद नियम नहीं बदले जा सकते

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी चयन प्रक्रिया के शुरू होने के बाद उसके नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता. जब विज्ञापन में विद्यालय को अल्पसंख्यक संस्थान बताया गया था और सरकारी अधिकारी चयन प्रक्रिया में शामिल हुए थे, तब नियुक्ति पूरी होने के बाद अलग रुख अपनाना उचित नहीं है.

नौकरशाही के रवैये पर अदालत की सख्त टिप्पणी

अदालत ने जिला शिक्षा अधीक्षक के रवैये पर नाराजगी जताते हुए इसे मनमाना और नौकरशाही शक्तियों के दुरुपयोग का उदाहरण बताया. कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों की देरी के कारण याचिकाकर्ताओं को दो बार अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा.

इसे भी पढ़ें: गुमला के गिरजा टंगराटोली में पानी और आंगनबाड़ी की बदहाली पर हाईकोर्ट सख्त, डीसी को निर्देश

30 दिनों में नियुक्ति की स्वीकृति और वेतन देने का आदेश

हाईकोर्ट ने जिला शिक्षा अधीक्षक, रांची को 30 दिनों के भीतर नियुक्ति की औपचारिक स्वीकृति जारी करने का निर्देश दिया है. साथ ही दोनों शिक्षिकाओं को 17 मई 2023 से सेवा लाभ देने और योगदान तिथि से वेतन जारी करने का आदेश दिया गया है. हालांकि अदालत ने पिछला बकाया वेतन देने से इनकार किया.

इसे भी पढ़ें: Ranchi News: दात्मा की जमीन विवाद पर आ गया हाईकोर्ट का फैसला, दूसरी अपील खारिज

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य के सभी सक्षम अधिकारियों को निर्देश दिया कि अल्पसंख्यक विद्यालयों में नियुक्ति स्वीकृति से जुड़े प्रस्तावों पर 60 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो. मानो कागजों की दुनिया में समय की गति किसी प्राचीन कछुए से भी धीमी हो. आखिर अदालत को याद दिलाना पड़ा कि फाइलें सजावट के लिए नहीं, फैसले लेने के लिए होती हैं.

इसे भी पढ़ें: बेटी ने अपनी मर्जी से कर ली प्रेमी संग शादी, बाप ने जीते जी कर दिया पिंडदान

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >