रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट
Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड मिनरल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (जेएमएडीए) में अनुकंपा नियुक्ति की मांग को लेकर दायर याचिका का निपटारा करते हुए 39 याचिकाकर्ताओं को संबंधित प्राधिकार के समक्ष नया प्रतिनिधित्व देने की छूट प्रदान की है. न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं की ओर से आवेदन प्राप्त होने के बाद सक्षम प्राधिकारी कानून और नियमों के अनुरूप तीन माह के भीतर निर्णय लें.
39 आश्रितों ने दायर की थी याचिका
डब्ल्यूपी (एस) संख्या 2139/2026 में धनबाद और आसपास के क्षेत्रों के 39 याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार, नगर विकास एवं आवास विभाग तथा झारखंड मिनरल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (जेएमएडीए) को पक्षकार बनाते हुए याचिका दाखिल की थी. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनके परिजनों की मृत्यु के बाद अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए आवेदन लंबित हैं, लेकिन जेएमएडीए अधिनियम, 2000 की धारा-5 के तहत प्राधिकरण के सदस्यों की नियुक्ति नहीं होने के कारण उनके मामलों पर विचार नहीं हो पा रहा है. उन्होंने अदालत से राज्य सरकार को आवश्यक नियुक्तियां करने का निर्देश देने और जेएमएडीए को उनके मामलों पर विचार करने का आदेश देने की मांग की थी.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने बदली रणनीति
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता बैभव गहलौत ने अदालत को बताया कि फिलहाल याचिका का निपटारा करते हुए उन्हें संबंधित अधिकारियों के समक्ष जाने की स्वतंत्रता प्रदान की जाए, ताकि उनकी शिकायतों का समाधान प्रशासनिक स्तर पर किया जा सके. वहीं राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने भी कहा कि यदि याचिकाकर्ता चाहें तो वे संबंधित प्राधिकार के समक्ष अपनी मांग रख सकते हैं और उस पर नियमानुसार विचार किया जाएगा.
प्रबंध निदेशक को दिया गया निर्णय लेने का निर्देश
दोनों पक्षों की सीमित दलीलों को सुनने के बाद न्यायमूर्ति दीपक रोशन ने याचिका का निपटारा करते हुए सभी याचिकाकर्ताओं को जेएमएडीए के प्रबंध निदेशक (प्रतिवादी संख्या-4) के समक्ष नया प्रतिनिधित्व दाखिल करने का निर्देश दिया. अदालत ने कहा कि जैसे ही प्रबंध निदेशक को कोई आवेदन प्राप्त होगा, वह लागू कानून और प्रासंगिक नियमों के अनुसार तीन माह के भीतर उस पर निर्णय लेंगे.
चार सप्ताह में होगी कार्रवाई
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि संबंधित प्राधिकारी का निर्णय याचिकाकर्ताओं के पक्ष में जाता है, तो उसके बाद आवश्यक अनुवर्ती कार्रवाई और आदेश अगले चार सप्ताह के भीतर जारी किए जाएंगे. अदालत ने कहा कि प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए और सक्षम प्राधिकारी को निर्धारित समयसीमा के भीतर निर्णय लेना होगा.
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याचिका का हुआ निपटारा
इस प्रकार न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकलपीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए मामले को प्रशासनिक स्तर पर निर्णय के लिए छोड़ दिया. अब सभी 39 याचिकाकर्ताओं की नजर जेएमएडीए के प्रबंध निदेशक के निर्णय पर टिकी है, जो उनके अनुकंपा नियुक्ति के लंबे समय से लंबित मामलों के भविष्य को तय करेगा. आखिर भारतीय न्याय व्यवस्था में कई बार अदालतें सीधे नियुक्ति का आदेश देने के बजाय संबंधित विभागों को पहले अपना काम करने का अवसर देती हैं, क्योंकि कागजों और नियमों की इस दुनिया में हर दरवाजा एक और आवेदन से ही खुलता है.
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