झारखंड पेयजल विभाग घोटाला मामला: 6 नोटिस के बाद भी नहीं आया क्लर्क संतोष, बर्खास्तगी की लटकी तलवार

Jharkhand Drinking Water Scam: झारखंड के पेयजल स्वच्छता विभाग में हुए 23 करोड़ रुपये के बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े का मुख्य आरोपी क्लर्क, संतोष कुमार, विभाग द्वारा दिए गए अंतिम मौके के बावजूद जांच कमेटी के सामने उपस्थित नहीं हुआ. छह बार नोटिस भेजे जाने के बाद भी आरोपी क्लर्क ने जांच से दूरी बनाए रखी है, जो अब उसकी सेवा समाप्ति (बर्खास्तगी) का पुख्ता आधार बनता जा रहा है. हालांकि, उसने विभाग को एक ई-मेल भेजकर चिकित्सीय कारणों का हवाला दिया है.

Jharkhand Drinking Water Scam, रांची (सतीश सिंह की रिपोर्ट): झारखंड के पेयजल स्वच्छता विभाग में 23 करोड़ रुपये के बहुचर्चित फर्जीवाड़े का मुख्य आरोपी क्लर्क संतोष कुमार एक बार फिर जांच कमेटी को ठेंगा दिखाते हुए उपस्थित नहीं हुआ. पेयजल विभाग ने अंतिम समय सीमा 28 अप्रैल 2026 तक का दिया था, जो अब समाप्त हो चुका है. संतोष का न आना अब विभाग के लिए उसकी सेवा समाप्ति (बर्खास्तगी) की प्रक्रिया को तेज करने का पुख्ता आधार बन गया है. छह बार नोटिस भेजे जाने के बाद भी आरोपी ने जांच प्रक्रिया से दूरी बनाए रखी है, जिससे उसकी नीयत पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

जांच कमेटी को ई-मेल, मेडिकल का बहाना

संतोष ने दफ्तर में इंतजार कर रहे अधिकारियों और जांच कमेटी के सदस्यों के सामने उपस्थित होने के बजाय, उसने विभाग को एक ई-मेल भेजा है. इस मेल में उसने दावा किया है कि वह “चिकित्सीय कारणों” (Medical Grounds) से शहर से बाहर है और इस समय उपस्थित होने में असमर्थ है. हालांकि, विभाग संतोष के इस दावे को पूरी तरह से जांच में देरी करने का प्रयास मान रहा है. इसके पीछे मुख्य वजह यह है कि पिछले तीन महीनों से उसका मोबाइल नंबर बंद है और वह लगातार फरार चल रहा है, जिससे उसके मेडिकल दावों पर शक गहराता है.

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एकपक्षीय फैसले की तैयारी में विभाग

जांच से जुड़े एक वरीय अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि संतोष कुमार को अपना पक्ष रखने और सफाई देने के लिए पर्याप्त अवसर दिए गए हैं. उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “छह बार नोटिस भेजने के बाद भी आरोपी क्लर्क का न आना यह स्पष्ट करता है कि वे जांच में सहयोग नहीं करना चाहते. अब विभाग के पास उपलब्ध साक्ष्यों, दस्तावेजों और गवाहों के आधार पर एकपक्षीय फैसला लेते हुए आगे की कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी.” सूत्रों के अनुसार, विभाग अब ज्यादा इंतजार करने के मूड में नहीं है और संतोष की बर्खास्तगी पर अंतिम निर्णय जल्द ही लिया जा सकता है.

ईडी और ऑडिट ने खोली पोल

संतोष कुमार की मुश्किलें और अधिक बढ़ सकती हैं, क्योंकि विभाग के पास 23 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी और मनी ट्रेल के पुख्ता सबूत पहले से ही मौजूद हैं. बताया जा रहा है कि संतोष ने न केवल फर्जी कागजातों के आधार पर सरकारी खजाने से पैसे निकाले, बल्कि उन पैसों को अपनी पत्नी के बैंक खाते और खुद की कंपनी, रॉक ड्रिल कंस्ट्रक्शन, में ट्रांसफर कर मनी लॉन्ड्रिंग की वारदात को भी अंजाम दिया. स्पेशल ऑडिट और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में भी ये मनी ट्रेल खुलकर सामने आ चुकी हैं. अब चूंकि उसने उपस्थित होकर अपनी सफाई पेश नहीं की, इसलिए जांच अधिकारी उसकी बर्खास्तगी पर निर्णय ले सकते हैं.

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Published by: Sameer Oraon

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