रांची के जगन्नाथपुर मंदिर प्रबंधन पर हाईकोर्ट नया आदेश, नई योजना पर सभी पक्षों से मांगा जवाब

रांची के जगन्नाथपुर मंदिर के प्रबंधन को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई. अदालत ने मंदिर के संचालन और प्रबंधन के लिए नई योजना पर सभी पक्षों से जवाब मांगा है. हर माह 30 हजार रुपये संचालन के लिए देने का भी निर्देश दिया गया है.


रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

Jharkhand High Court: रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर की न्यास समिति को भंग कर नई समिति के गठन के लिए झारखंड हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड के आदेश को चुनौती देने वाले मामले में बुधवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने मंदिर के भविष्य के प्रशासन और प्रबंधन को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए. सुनवाई के दौरान झारखंड हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड की ओर से मंदिर के संचालन और प्रबंधन की विस्तृत योजना अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गई. अदालत ने इस प्रस्तावित योजना पर सभी संबंधित पक्षों को अपना जवाब और सुझाव दाखिल करने का निर्देश दिया है, ताकि सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जा सके.

मंदिर संचालन के लिए हर माह 30 हजार देने का आदेश

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने रांची के उपायुक्त को निर्देश दिया कि जगन्नाथपुर मंदिर की समिति के फंड से हर महीने 30 हजार रुपये मंदिर के नियमित संचालन के लिए उपलब्ध कराए जाएं. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर समिति को प्रत्येक सप्ताह खर्च का पूरा ब्योरा उपायुक्त को उपलब्ध कराना होगा. अदालत का उद्देश्य मंदिर की नियमित पूजा-पाठ, रखरखाव और अन्य आवश्यक गतिविधियों को बिना किसी बाधा के जारी रखना है.

बोर्ड को पहले ही दी गई थी योजना बनाने की जिम्मेदारी

इस मामले की पिछली सुनवाई 23 जून 2026 को हुई थी. उस समय हाईकोर्ट ने झारखंड हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड को निर्देश दिया था कि वह झारखंड हिंदू धार्मिक न्यास अधिनियम की धारा 32 के तहत मंदिर के संचालन और प्रबंधन की विस्तृत योजना तैयार कर अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे. अदालत ने स्पष्ट किया था कि मंदिर के प्रशासनिक ढांचे को लेकर एक व्यवस्थित और कानूनी रूप से मजबूत योजना आवश्यक है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो. बुधवार की सुनवाई में बोर्ड ने उसी निर्देश के अनुरूप अपनी प्रस्तावित योजना अदालत में पेश की. अब इस योजना पर याचिकाकर्ता सहित सभी संबंधित पक्ष अपने सुझाव और आपत्तियां दाखिल करेंगे. इसके बाद अदालत अगली सुनवाई में योजना की व्यवहारिकता और कानूनी पहलुओं पर विचार करेगी.

सुरक्षा व्यवस्था पर सरकार ने कोर्ट को दी जानकारी

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहितश्य रॉय ने अदालत को बताया कि जगन्नाथपुर मंदिर की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट के पूर्व आदेश का पूरी तरह पालन किया गया है. उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर और आसपास पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है, जिससे श्रद्धालुओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके. सरकार ने अदालत को यह भी भरोसा दिलाया कि मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था लगातार मजबूत रखी जाएगी और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार है.

पिछली सुनवाई में 24 घंटे सुरक्षा का दिया गया था निर्देश

हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को स्पष्ट निर्देश दिया था कि मंदिर के अंदर और बाहर चौबीसों घंटे पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की जाए. अदालत ने कहा था कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा, मंदिर की संपत्ति की रक्षा और परिसर में शांति व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है. इसी निर्देश के अनुपालन की जानकारी राज्य सरकार ने अदालत को दी और बताया कि सुरक्षा संबंधी सभी आवश्यक कदम उठाए जा चुके हैं.

दोनों पक्षों ने रखीं अपनी दलीलें

मामले की सुनवाई के दौरान झारखंड हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड की ओर से वरीय अधिवक्ता राजीव रंजन और भारत कुमार ने अदालत में पक्ष रखा. वहीं याचिकाकर्ता की ओर से वरीय अधिवक्ता विपिन सिंह और रवि कुमार सिंह ने अपनी दलीलें प्रस्तुत कीं. दोनों पक्षों ने मंदिर के प्रशासन, न्यास समिति और प्रबंधन व्यवस्था से जुड़े विभिन्न कानूनी पहलुओं पर अदालत का ध्यान आकर्षित किया.

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अगली सुनवाई में तय होगी आगे की दिशा

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि धार्मिक न्यास बोर्ड द्वारा प्रस्तुत योजना पर सभी पक्षों के जवाब और सुझाव प्राप्त होने के बाद मामले की आगे की सुनवाई की जाएगी. अदालत यह तय करेगी कि मंदिर के प्रशासन और प्रबंधन के लिए कौन-सा ढांचा सबसे उपयुक्त और कानूनसम्मत होगा. जगन्नाथपुर मंदिर रांची के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है और हर वर्ष रथ यात्रा सहित कई धार्मिक आयोजनों का केंद्र रहता है. ऐसे में हाईकोर्ट की यह कार्यवाही न केवल मंदिर के प्रशासनिक भविष्य के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, बल्कि श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और मंदिर की व्यवस्थित व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक अहम कदम है.

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लेखक के बारे में

Published by: Kumarvishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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