रांची: इस्कॉन मंदिर में वृषभानु नंदिनी श्री राधारानी का प्राकट्य उत्सव शनिवार को श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया गया. कार्यक्रम की शुरुआत सुबह मंगल आरती से हुई. इसके बाद दिनभर मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान और भक्ति कार्यक्रम आयोजित किये गये. संध्या समय 'जय राधा माधव, जय कुंज बिहारी' के मधुर कीर्तन के साथ भजन और भक्तिमय सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुईं. इस दौरान श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आये. उत्सव के अवसर पर श्री राधा-कृष्ण का 21 पवित्र द्रव्यों से महाअभिषेक किया गया. इसके बाद भगवान को 108 प्रकार के छप्पन भोग और विभिन्न व्यंजनों का विशेष भोग अर्पित किया गया.
राधारानी की अनुकंपा से मिलती है कृष्ण भक्ति
इस्कॉन रांची के महाप्रबंधक मधुसूदन मुकुंद दास ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए श्री राधारानी के प्राकट्य और उनके आध्यात्मिक महत्व पर कथा सुनायी. उन्होंने कहा कि श्री राधारानी की अनुकंपा के बिना श्रीकृष्ण की निश्छल भक्ति प्राप्त करना संभव नहीं है. उन्होंने बताया कि कलियुग में श्री चैतन्य महाप्रभु स्वयं राधाभाव लेकर प्रकट हुए और हरिनाम संकीर्तन के माध्यम से दुनिया में कृष्ण भक्ति का प्रसार किया. उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवन में नियमित रूप से 'हरे कृष्ण' महामंत्र का जाप और संकीर्तन करने का आह्वान किया.
महाआरती के बाद हुआ प्रसाद वितरण
संध्या समय महाआरती और उच्च स्वर में हरिनाम संकीर्तन के साथ मुख्य धार्मिक अनुष्ठानों का समापन हुआ. उत्सव के अंत में बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं के बीच चरणामृत और महाप्रसाद का वितरण किया गया.
