सुनील चौधरी की रिपोर्ट
रांचीः झारखंड में बिजली के खंभों पर बेतरतीब तरीके से लगाए गए टेलीकॉम और ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) को लेकर झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) ने सख्ती शुरू कर दी है. निगम का कहना है कि बिजली के पोल पर असुरक्षित तरीके से लगे केबल और उपकरण न सिर्फ बिजली व्यवस्था के लिए परेशानी पैदा कर सकते हैं, बल्कि सड़क से गुजरने वाले लोगों और वाहनों के लिए भी खतरा बन सकते हैं.
16 अगस्त तक केबल ठीक करने का दिया था समय
JBVNL ने टेलीकॉम कंपनियों को अपने केबल और उपकरणों को तय सुरक्षा मानकों के अनुसार व्यवस्थित करने के लिए 16 अगस्त तक का समय दिया था. निगम ने साफ किया है कि तय समय तक अगर असुरक्षित या अनधिकृत केबल नहीं हटाये या ठीक किये गये, तो 17 अगस्त से इन्हें हटाने की कार्रवाई शुरू की जा सकती है. खास बात यह है कि केबल हटाने के दौरान आने वाला खर्च भी संबंधित कंपनी से ही वसूला जायेगा. यानी अब कंपनियों के पास अपने केबल की स्थिति सुधारने के लिए ज्यादा समय नहीं बचा है.
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BSNL, Airtel, Reliance और Vodafone को निर्देश
इस मामले में BSNL, Airtel, Reliance और Vodafone जैसी टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिये जाने की जानकारी है. हालांकि, किसी कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की स्थिति उसके केबल, उपकरण, पोल के इस्तेमाल और संबंधित अनुमति की स्थिति पर निर्भर करेगी.
नीचे लटकते केबल बन रहे परेशानी
JBVNL की चिंता केवल बिजली के पोल पर लगे केबल तक सीमित नहीं है. कई जगहों पर सड़क के ऊपर कम ऊंचाई पर लटकते या उलझे हुए केबल भी नजर आते हैं. ऐसे केबल से राहगीरों और वाहन चालकों को खतरा हो सकता है. बारिश और तेज हवा के दौरान ढीले या टूटे हुए केबल सड़क पर गिर सकते हैं. इससे दुर्घटना होने की आशंका बढ़ जाती है. इसी वजह से JBVNL ऐसे केबलों को सुरक्षा के लिहाज से गंभीरता से ले रहा है.
कंपनियों से मांगी जा सकती है पोल और केबल की जानकारी
JBVNL टेलीकॉम कंपनियों से बिजली के पोल पर लगे केबल और उपकरणों की पूरी जानकारी भी मांग रहा है. इसमें कितने पोल का इस्तेमाल किया जा रहा है, कितने केबल लगे हैं और वे किस स्थान पर हैं, जैसी जानकारी शामिल हो सकती है. पोल की GPS लोकेशन मिलने से निगम को यह पता लगाने में आसानी होगी कि किन जगहों पर केबल सुरक्षित तरीके से लगे हैं और कहां नियमों का पालन नहीं हो रहा है.
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रांची समेत इन जिलों में होगी निगरानी
रांची, खूंटी, गुमला, लोहरदगा और सिमडेगा के विभिन्न विद्युत आपूर्ति क्षेत्रों में बिजली के पोल पर लगे टेलीकॉम केबल और उपकरणों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है. इन क्षेत्रों में असुरक्षित या अनधिकृत तरीके से लगे केबलों की पहचान कर कार्रवाई की जा सकती है.
आखिर JBVNL क्यों बरत रहा है सख्ती ?
दरअसल, बिजली के पोल पर टेलीकॉम केबल या कोई अन्य उपकरण लगाने के लिए उचित अनुमति और सुरक्षा नियमों का पालन जरूरी है. बिना सही व्यवस्था के पोल पर अतिरिक्त केबल और उपकरण लगाने से बिजली के बुनियादी ढांचे पर दबाव पड़ सकता है. इसके अलावा पोल पर काम करने वाले बिजली कर्मचारियों के लिए भी उलझे और बेतरतीब केबल परेशानी पैदा कर सकते हैं. सड़क के ऊपर लटके केबल आम लोगों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकते हैं.
कंपनियों के पास अब क्या विकल्प है ?
अब संबंधित टेलीकॉम कंपनियों को अपने केबल और उपकरणों की जांच कर उन्हें तय सुरक्षा मानकों के अनुसार व्यवस्थित करना होगा. जहां केबल अनधिकृत, असुरक्षित या नियमों के खिलाफ पाए जाएंगे, वहां JBVNL उन्हें हटाने की कार्रवाई कर सकता है. ऐसे में 16 अगस्त की समय-सीमा खत्म होने के बाद 17 अगस्त से होने वाली संभावित कार्रवाई पर टेलीकॉम कंपनियों की नजर रहेगी. निगम का मुख्य उद्देश्य बिजली के पोल और सड़क किनारे लगे केबलों को सुरक्षित बनाना है, ताकि बिजली व्यवस्था के साथ आम लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके.
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