फर्जी सीबीआई अफसर बन कारोबारी से 1.67 करोड़ ठगे, रांची से दो गिरफ्तार

मुंबई के एक कारोबारी से 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर 1.67 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हुई. मुंबई साइबर पुलिस ने इस मामले में रांची से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जानें कैसे ठगों ने डर दिखाकर ठगी को अंजाम दिया.

रांची से प्रणव सिंह की रिपोर्ट 

Digital Arrest Cyber Fraud: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी के एक मामले में मुंबई साइबर पुलिस ने रांची से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बरियातू के कुसुम विहार निवासी जगेश्वर महतो (43 वर्ष) और पुंदाग क्षेत्र के जाबिर हुसैन (47 वर्ष) के रूप में हुई है. दोनों को स्थानीय पुलिस की मदद से पकड़ा गया और ट्रांजिट रिमांड पर मुंबई ले जाया गया है. मामले की जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ठगी की रकम का एक हिस्सा रांची के जगेश्वर महतो और जाबिर हुसैन के खातों में पहुंचा था. इसी आधार पर दोनों की गिरफ्तारी हुई. पुलिस अब सूरज नामक एक अन्य आरोपी समेत पूरे नेटवर्क की तलाश में जुटी है. करोड़ों रुपये के डिजिटल अरेस्ट घोटाले में रांची से गिरफ्तारी का यह पहला मामला माना जा रहा है. 

मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी

मामला मुंबई के 55 वर्षीय आईटी कंसल्टेंट रुशांग महेंद्र वोरा से जुड़ा है, जिन्हें अप्रैल 2026 में डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 1.67 करोड़ रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया. साइबर अपराधियों ने सबसे पहले उन्हें फोन कर खुद को ब्लू डार्ट कूरियर कंपनी का कर्मचारी बताया. कॉल करने वालों ने दावा किया कि उनके नाम से भेजा गया एक पार्सल कस्टम विभाग ने जब्त किया है, जिसमें पांच पासपोर्ट, तीन एटीएम कार्ड, एक लैपटॉप और 200 ग्राम एमडीएमए ड्रग्स बरामद हुई है. इसके बाद ठगों ने खुद को पुलिस और सीबीआइ अधिकारी बताकर कारोबारी को मनी लाउंड्रिंग मामले में फंसाने की धमकी दी. उन्होंने यह भी कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों में हुआ है और उनका नाम एक चर्चित मनी लाउंड्रिंग मामले से जुड़ा हुआ है. 

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डर दिखाकर कारोबारी से 1.67 करोड़ वसूले

भरोसा दिलाने के लिए आरोपियों ने व्हाट्सऐप पर सीबीआइ, भारतीय रिजर्व बैंक और सुप्रीम कोर्ट के नाम और लोगो वाले फर्जी दस्तावेज भेजे. ठगों ने कारोबारी को लगातार निगरानी में रखने का दावा करते हुए उनके मोबाइल फोन में सिग्नल एप डाउनलोड करवाया. इसके बाद बैंक खातों, निवेश और वित्तीय संपत्तियों की पूरी जानकारी हासिल कर ली. आरोपियों ने शेयर, म्यूचुअल फंड और सरकारी बॉन्ड बेचने की सलाह देते हुए कहा कि जांच और सत्यापन के लिए कुल राशि का 88 प्रतिशत एक विशेष बैंक खाते में जमा करना होगा, जिसे बाद में लौटा दिया जायेगा. डर और दबाव में आकर कारोबारी ने एचडीएफसी और आइसीआइसीआइ बैंक खातों से विभिन्न खातों में कुल 1.67 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिये. इसके बाद ठगों ने उनसे 80 लाख रुपये और मांगने शुरू कर दिये. जब कारोबारी को ठगी का एहसास हुआ तो उन्होंने 21 अप्रैल को साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करायी. 

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लेखक के बारे में

By प्रिया गुप्ता

प्रिया गुप्ता प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. फिलहाल वह झारखंड से जुड़ी खबरों पर काम करती हैं, जिनमें सरकारी योजनाएं, प्रमुख घटनाएं, सामाजिक मुद्दे और अन्य महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं. इससे पहले वह लाइफस्टाइल डेस्क पर फैशन, हेल्थ, रिलेशनशिप, पैरेंटिंग और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं. प्रिया ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से स्नातक और अमिटी यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री हासिल की है.

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