Cybersecurity Awareness: सार्वजनिक सेवा और प्रशासन में साइबर प्रत्यास्थता के बढ़ते महत्व को ध्यान में रखते हुए, एशिया फाउंडेशन इंडिया कार्यालय ने साइबरपीस के साथ तकनीकी सहयोग में 3 जुलाई 2026 को रांची में झारखंड विधान सभा के माननीय सदस्यों के लिए एक डिजिटल सुरक्षा और साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया. एशिया फाउंडेशन के एपीएसी साइबर सुरक्षा फंड प्रोग्राम के तहत आयोजित इस पहल को गूगल डॉट ओआरजी का समर्थन मिला.
इसका प्रोग्राम का उद्देश्य उभरते डिजिटल खतरे से निपटने और तेजी से कनेक्टेड होती दुनिया में संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा के लिए विधायकों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान कर उनकी साइबर तैयारियों को मजबूत करना था.
आज के दौर में बढ़ते साइबर हमलों को देखते हुए निर्वाचित प्रतिनिधियों को जागरुक बनाना और साइबर स्वच्छता को बढ़ावा देना बेहद ज़रूरी हो गया है. इस तरह के खतरे फ़िशिंग, पहचान की चोरी, सोशल इंजीनियरिंग और गलत जानकारी के ज़रिए सार्वजनिक अधिकारियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसी के मद्देनज़र विशेषज्ञों के नेतृत्व में आयोजित चचाओं और व्यवहारिक प्रदर्शनों ने प्रतिभागियों को अपनी डिजिटल पहचान, आधिकारिक कम्युनिकेशन एवं ऑनलाईन जुड़ाव को सुरक्षित बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी दी गई.
कार्यक्रम की शुरुआत लोकतांत्रिक संस्थानों को मजबूत करने और सुरक्षित शासन सुनिश्चित करने में साइबर सुरक्षा के महत्व पर रोशनी डालने वाली टिप्पणियों और प्रासंगिक चर्चाओं के साथ हुई. इसके बाद साइबरपीस के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित की गई, जिसमें आज के दौर के साइबर खतरों, सार्वजनिक प्रतिनिधियों के लिए साइबर जोखिम, पासवर्ड सुरक्षा, मल्टी-फैक्टर ऑथेन्टिकेशन, डिवाइस सुरक्षा, फ़िशिंग का पता लगाना, ईमेल सुरक्षा, सोशल मीडिया सुरक्षा और व्यवहारिक साइबर रक्षा उपायों को शामिल किया गया.
घटना प्रतिक्रिया और रिपोर्टिंग प्रणाली पर एक विशेष सत्र ने प्रतिभागियों को समय पर रिपोर्टिंग, सबूतों के संरक्षण और साइबर घटनाओं पर प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने के महत्व से परिचित कराया. कार्यक्रम का समापन मेंटीमीटर द्वारा पावर्ड रोचक इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जहां प्रतिभागियों को अपनी गोपनीयता बनाए रखतेे हुए सवाल पूछने, लाइव पोल में हिस्सा लेने और सार्वजनिक जीवन में आने वाली साइबर सुरक्षा चुनौतियों पर विशेषज्ञों का मार्गदर्शन प्राप्त करने का मौका मिला.
प्रतिभागियों को कार्यशाला के दायरे से आगे बढ़कर भी लगातार सीखने का मौका मिलना चाहिए, इसी सोच केे साथ प्रतिभागियों को विशेष रूप से तैयार की गई साइबर सिक्योरिटी क्विक गाईड दी गई. इस मार्गदर्शिका में साइबरसुरक्षा के लिए ज़रूरी दस सुरक्षा प्रथाओं की रूपरेखा दी गई है, जो मजबू पासवर्ड हाइजीन, टू-फैक्टर ऑथेन्टिकेशन, संदिग्ध कम्युनिकेशन के वैरिफिकेश, मोबाइल उपकरणों की सुरक्षा, सोशल मीडिया पर सावधानी बरतने, आधिकारिक जानकारी सुरक्षित करने और बिना देरी के साइबर घटनाओं को रिपोर्ट करने पर ज़ोर देती है. साथ ही फाइन्डेशन के एस ए एफ ई नियम को भी पेश किया, जो यूज़र्स को प्रोत्साहित करता है कि क्लिक करने से पहले रूकें, हर खाते को प्रमाणित करें, हर रिक्वेस्ट से जुड़े तथयों की जांच करें और किसी भी संदिग्ध घटना के मामले में तुरंत रिपोर्ट दर्ज करें.
इस अवसर पर साइबरपीस के संस्थापक और ग्लोबल प्रेज़ीडेन्ट मेजर विनीत कुमार ने कहा, “आज डिजिटल टेक्नोलॉजी ने प्रशासन एवं सार्वजनिक जुड़ाव को पूरी तरह से बदल दिया है, हालांकि इसके साथ कई नई कमज़ोरियां भी उभर कर आई हैं, जिनके लिए लगातार सतर्कता बरतना ज़रूरी हो गया है. सार्वजनिक प्रतिनिधि डिजिटल प्लेटफॉम्स के माध्यम से संवेदनशील जानकारी का प्रबंधन करते हैं. ऐसे में संस्थागत स्तर पर प्रत्यास्थता बनाए रखने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की रक्षा के लिए उनकी साइबर जागरूकता बेहद आवश्यक है. साइबरपीस आपसी सहयोग, जागरूकता और क्षमता निर्माण के द्वारा सुरक्षित, प्रत्यास्थ और समावेशी डिजिटल प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है.”
नंदिता बरुआ, कंट्री रिप्रेज़ेन्टेटिव – भारत, द एशिया फाउंडेशन ने कहा कि “विधायक शैक्षणिक संस्थानों, सुरक्षा एजेंसियों, स्वास्थय और व्यापार निकायों जैसे कई हितधारकों के बड़े निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं. विधायकों को सशक्त बनाना यह सुनिश्चित करता है कि सभी महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और संस्थानों की डिजिटल और साइबर सुरक्षा को प्राथमिकता मिले.’’
इस प्रोग्राम का सफलतापूर्वक आयोजित होना साइबर जागरूकता को बढ़ावा देने, संस्थागत प्रत्यास्थता को मजबूत बनाने और सार्वजनिक नेताओं के बीच जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए साइबरपीस, द एशिया फाउंडेशन और झारखंड विधान सभा सचिवालय की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है. जैसे-जैसे साइबर खतरे बढ़ रहे हैं, इस तरह की पहलें विकसित होते डिजिटल दौर में निर्णय निर्माताओं को जरूरी जानकारी और आत्मविश्वास प्रदान करने में मुख्य भूमिका निभाती हैं.
