झारखंड की लुप्तप्राय जनजातियों पर शोध करेंगे CUJ के प्रोफेसर डॉ. राजेश कुमार, ICSSR ने दी मंजूरी

CUJ Jharkhand Research: भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन ICSSR ने झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUJ) के एक महत्वपूर्ण शोध प्रोजेक्ट का चयन किया है. जनसंचार विभाग के डॉ. राजेश कुमार के नेतृत्व में असुर, कोरवा और पहाड़ी खड़िया जनजातीय समूहों की सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना और उनकी पारंपरिक विश्वास प्रणाली में आ रहे बदलावों का अध्ययन किया जायेगा.

CUJ Jharkhand Research, रांची : भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय से संचालित भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसआर) ने झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ राजेश कुमार को एक महत्वपूर्ण शोध परियोजना चयनित किया है. यह परियोजना झारखंड के विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी)—असुर, कोरवा और पहाड़ी खड़िया पर केंद्रित होगी. इस शोध परियोजना में डॉ. राजेश कुमार प्रोजेक्ट डायरेक्टर की भूमिका निभायेंगे, जबकि वाणिज्य एवं वित्तीय अध्ययन विभाग के प्रोफेसर केबी सिंह और राजनीति विज्ञान एवं लोक प्रशासन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर शशांक दत्तात्रेय कुलकर्णी को-प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में शामिल होंगे.

तीन जिलों में होगा फील्ड आधारित अध्ययन

शोध कार्य झारखंड के सिमडेगा, लोहरदगा और गुमला जिला में रहने वाले असुर, कोरवा और पहाड़ी खड़िया जनजातीय समुदायों पर किया जायेगा. अध्ययन के तहत इन समुदायों की सामाजिक संरचना, सांस्कृतिक परंपराएं और पारंपरिक विश्वास प्रणालियों में हो रहे बदलावों का गहन विश्लेषण किया जायेगा.

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2025–26 की चयनित बहुविषयक परियोजनाओं में शामिल

वर्ष 2025–26 के लिए आईसीएसआर द्वारा जारी बहुविषयक शोध परियोजनाओं की सूची में झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय की इस परियोजना को शामिल किया जाना विश्वविद्यालय के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. यह परियोजना विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समुदायों के बदलते सामाजिक और सांस्कृतिक परिदृश्य को समझने की दिशा में अहम कदम है.

नीति निर्माण में बनेगा उपयोगी संदर्भ

तीनों शिक्षाविदों की संयुक्त भागीदारी से संचालित यह बहुविषयक शोध समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, जनसंचार और अर्थशास्त्र जैसे विषयों को एक साथ जोड़ते हुए जनजातीय समाज से जुड़े जटिल मुद्दों को वैज्ञानिक और अकादमिक दृष्टिकोण से सामने लाएगा. उम्मीद जताई जा रही है कि यह अध्ययन भविष्य में नीति-निर्माण, जनजातीय कल्याण योजनाओं और सामाजिक अनुसंधान के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ के रूप में उपयोगी सिद्ध होगा.

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Published by: Sameer Oraon

समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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