Jharkhand News: सड़क हादसे में मृत छात्र के परिवार को 10.98 लाख रुपये मुआवजा, हाइकोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील खारिज की

झारखंड हाइकोर्ट ने सड़क हादसे में मृत छात्र के परिवार को मिलने वाले मुआवजे की राशि बढ़ाकर 10.98 लाख रुपये कर दी है। बीमा कंपनी की अपील को अदालत ने खारिज किया।

रांची: झारखंड हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अदालत ने सड़क हादसे में मृत 23 वर्षीय छात्र के परिवार के लिए मुआवजे राशि बढ़ा कर 10.98 लाख रुपये कर दी है. अदालत ने कहा है कि पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम काम और ट्यूशन करनेवाले युवा की आय का आकलन केवल इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि उसके पास पूरी आय से जुड़े दस्तावेज नहीं हैं. उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों को देखते हुए मृतक की मासिक आय 6,000 रुपये मानना उचित है.

अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद आय प्रमाण-पत्र में मृतक को टेक्निकल एंड इंजीनियरिंग सेंटर में ड्राफ्ट्समैन के रूप में 4,500 रुपये मासिक भुगतान का उल्लेख है. केवल संस्था के पंजीकृत नहीं होने के कारण इस दस्तावेज को खारिज नहीं किया जा सकता. इसके अलावा मेकन रांची का गेट पास भी मिला, जो उसके वहां से जुड़े होने का संकेत देता है.

शैक्षणिक दस्तावेजों से भी पता चलता है कि वह पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम काम कर रहा था. गवाहों ने ट्यूशन व पार्ट टाइम काम से करीब 4,500-4,500 रुपये मासिक आय की बात कही थी. अदालत ने हालांकि पूरी मौखिक गवाही को स्वीकार करने के बजाय सभी साक्ष्यों को देखते हुए आय 6,000 रुपये मासिक तय की. अदालत ने बीमा कंपनी की अपील खारिज करते हुए मुआवजा बढ़ाने का आदेश दिया.

कंपनी को बढ़ी हुई राशि आठ सप्ताह के भीतर जमा करने का निर्देश\\अदालत ने कहा कि अपीलीय अदालत के पास उचित मुआवजा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त अधिकार हैं, भले ही पीड़ित पक्ष ने अलग से क्रॉस अपील या आपत्ति दायर न की हो.

ट्रिब्यूनल द्वारा तय नौ प्रतिशत ब्याज और डिफॉल्ट की स्थिति में 11 प्रतिशत ब्याज की व्यवस्था को बरकरार रखा गया. बीमा कंपनी को बढ़ी हुई राशि आठ सप्ताह के भीतर ट्रिब्यूनल में जमा करने का निर्देश दिया गया. मुआवजा राशि चारों दावेदारों में बराबर बांटी जायेगी.

उल्लेखनीय है कि बीमा कंपनी ने मुआवजे के आकलन और 11 प्रतिशत दंडात्मक ब्याज को चुनौती दी थी. बोकारो क्लेम ट्रिब्यूनल ने 15 दिसंबर 2016 को मृतक के परिजनों को 7.07 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था. इसमें छह अगस्त 2015 से भुगतान तक नौ प्रतिशत सालाना ब्याज और निर्धारित समय पर भुगतान नहीं होने पर 11 प्रतिशत दंडात्मक ब्याज का प्रावधान किया गया था.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Rana pratap

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >