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रांची में ये कैसा गैंग! 56.42 करोड़ का चेक कैश कराना चाहते थे, चेक पर थे यूपी के बड़े अधिकारी के साइन

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
Ranchi News : सदर थाना में सभी चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया.
Ranchi News : सदर थाना में सभी चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया.
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रांची : झारखंड की रांची में एक गैंग सक्रिय है. ये लोग फर्जी चेक के जरिये बड़े-बड़े बैंक से रुपये निकाल रहे हैं. चेक क्लोनिंग का यह खेल लंबे समय से चला आ रहा है, लेकिन गुरुवार (27 अगस्त, 2020) को जो गैंग पुलिस की गिरफ्त में आया है, उसने सबके होश उड़ा दिये हैं. यह गैंग 56.42 करोड़ रुपये यानी 56 करोड़ 42 लाख रुपये के चेक के साथ घूम रहे थे और इसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के किसी ब्रांच से कैश कराना चाहते थे.

इससे पहले कि ये अपने मंसूबों को अंजाम दे पाते, पुलिस ने इन्हें धर दबोचा. इन लोगों के पास से स्टेट बैंक का जो 56.42 करोड़ का चेक बरामद हुआ है, उस पर उत्तर प्रदेश के एक बड़े अधिकारी के हस्ताक्षर हैं. राजेश पासवान, मनीष कुमार सिन्हा, विजय बर्मन और अजय सिंह नामक इन लोगों के तार दिल्ली से जुड़े हैं. इसलिए रांची पुलिस को दिल्ली और लखनऊ भी जांच के लिए जाना पड़ेगा.

सिटी एसपी के अनुसार, आरोपियों के पास से नरेगा आयुक्त उत्तर प्रदेश का हस्ताक्षर किया हुआ 56,42,19,687 रुपये का भारतीय स्टेट बैंक का चेक बरामद हुआ है. यह चेक पीएसएमई कंस्ट्रक्शन एंड स्टाफिंग सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के नाम से जारी किया गया है.

चेक का सत्यापन जब स्थानीय बैंक एवं मनरेगा आयुक्त लखनऊ, उत्तर प्रदेश के कार्यालय से किया गया, तब मनरेगा आयुक्त कार्यालय ने बताया कि उक्त चेक उनके कार्यालय से बैंक के लिए निर्गत नहीं हुआ था. तब आरोपियों से चेक के संबंध में पूछताछ शुरू की गयी.

पूछताछ के दौरान पता चला कि आरोपियों का कनेक्शन दिल्ली निवासी सतीश ठाकुर एवं कुणाल नामक व्यक्ति से है. कुणाल ने ही 22 अगस्त को दिल्ली से रांची आकर एयरपोर्ट पर आरोपियों को चेक दिया था. चारों आरोपी बैंक के जरिये संबंधित कंपनी में पैसा ट्रांसफर कराने वाले थे.

कंपनी में पैसा ट्रांसफर हो जाने के बाद कमीशन के रूप में इन चारों लोगों को कुल राशि का पांच प्रतिशत देने का वादा किया गया था. अब रांची पुलिस ने इन चारों लोगों के खिलाफ सदर थाना में केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है.

ऐसे पकड़ में आये आरोपी

पुलिस का कहना है कि राजेश पासवान का संबंध दिल्ली के आरोपियों से हैं. वह पेशे से ईंट-बालू का सप्लायर है. विजय बर्मन मूल रूप से गिरिडीह का रहने वाला है और उसके खिलाफ वहां धोखाधड़ी का केस दर्ज है. दो अन्य आरोपी फाइनेंस के काम से जुड़े हैं.

चारों मिलकर चेक को कैश कराने और रुपये ट्रांसफर कराने को लेकर मेडिका अस्पताल स्थित चौक के पास जुटे थे. एक बैंक अधिकारी से चेक को क्लियर कराने के लिए बातचीत की, लेकिन वह तैयार नहीं हुआ. इस बीच, कुछ लोगों ने चेक में इतनी बड़ी रकम देख पुलिस को सूचना दे दी.

लोगों से सूचना मिलने के बाद पुलिस वहां पहुंची और चारों लोगों को चेक के साथ गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार कर इनसे पूछताछ की गयी, तो उन्होंने पूरी कहानी बतायी. इसके बाद पुलिस ने सदर थाना में इन सभी लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया.

पुलिस जांच के लिए जायेगी लखनऊ और दिल्ली

पुलिस के अनुसार, जिस कंपनी के नाम पर चेक जारी किया गया था, उसके सत्यापन के लिए पुलिस लखनऊ जायेगी. इसके अलावा पूछताछ में दिल्ली में रहने वाले जिन दो आरोपियों के नाम सामने आये हैं, उनका भी सत्यापन करने के लिए पुलिस दिल्ली जायेगी.

तभी स्पष्ट हो पायेगा कि आरोपियों ने किस तरह से यूपी के अधिकारी के नाम पर फर्जी चेक तैयार किया. इस बात की आशंका है कि प्रिंटर के जरिये चेक का क्लोन तैयार कर मनरेगा आयुक्त लखनऊ के सरकारी अकाउंट से राशि की निकासी का प्रयास किया जा रहा था.

रांची के रहने वाले हैं सभी चार आरोपी

चारों आरोपी रांची के रहने वाले हैं. तीन आरोपी रांची के हैं. इनमें राजेश पासवान न्यू कॉलोनी हैदर अली रोड का रहने वाला है, तो मनीष कुमार सिन्हा हरमू हाउसिंग कॉलोनी के क्वार्टर नंबर 306 इमली चौक का निवासी है. तीसरा आरोपी विजय वर्मन है, जो चुटिया के महादेव मंडप का रहने वाला है. अजय सिंह उर्फ पप्पू हरमू हाउसिंग कॉलोनी के क्वार्टर नंबर 17/4 का निवासी है.

Posted By : Mithilesh Jha

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